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तनाव की दहलीज पर दुनिया: मोजतबा खामेनेई की पहली हुंकार और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बिगुल

मोजतबा खामेनेई का पहला बयान
मोजतबा खामेनेई का पहला बयान
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Written by
Rishabh Rai

दुनिया आज ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी नज़र आती है जहाँ एक ओर वैश्विक शक्ति समीकरण बदलता दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक दुश्वारियों और राजनीतिक तनावों ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भू–रणनीति को गंभीर चुनौती दे दी है। ईरान के नए सुप्रीम कमांडर मोजतबा खामेनेई ने पदभार संभालते ही ऐसी बयानबाज़ी की है जिसने वैश्विक राजनीति की दिशा को एक नए स्तर पर ला खड़ा किया है। उनका यह पहला सार्वजनिक संदेश मात्र कूटनीतिक संकेत नहीं रहा बल्कि एक प्रत्यक्ष और तीव्र चेतावनी की शक्ल में सामने आया है जिसने वैश्विक बाजारों और सुरक्षा परिदृश्यों में हड़कंप मचा दिया है।

जैसे ही मोजतबा खामेनेई ने ईरान की सर्वोच्च आर्मी कमान संभाली, कयासों और उम्मीदों के बीच यह अनुमान किया जा रहा था कि नई नेतृत्व शैली शायद किसी सुलह या बातचीत की दिशा में कदम बढ़ाएगी। हालांकि, उनका पहला बयान उन सभी अनुमान- विशेषकर सुलह और शांति की संभावनाओं- पर विराम जैसा प्रतीत हुआ। न केवल उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कटु शब्दों में लताड़ा, बल्कि दुनिया के सामने एक स्पष्ट स्थिति भी पेश की कि ईरान अब किसी भी प्रकार के दबाव और सामरिक धमकियों से घबराने वाला नहीं है।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: तेल और भू- राजनीति की गर्दन

विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संबंध में उनके बयान ने वैश्विक तेल बाजारों में भी सुर्खियाँ बना दीं। यह जल मार्ग दुनिया के ऊर्जा परिवहन का एक मुख्य नोड है- जहाँ से प्रतिदिन करोड़ों बैरल तेल का यातायात होता है। खामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज के द्वार ‘अब बंद’ रहेंगे और कोई भी शक्ति चाहे वह अमेरिका हो या उसके सहयोगी, इस क्षेत्र की सुरक्षा में हस्तक्षेप नहीं कर पाएगी।

उनके इस बयान का वैश्विक तेल बाजार पर तुरंत प्रभाव दिखा, जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव रातों रात बढ़ने लगे और वित्तीय संस्थानों तथा ऊर्जा कंपनियों में चिंता की लहर दौड़ पड़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति स्थायी रूप से बनी रहती है, तो न केवल ईंधन की कीमतें नई ऊँचाइयों को छू सकती हैं बल्कि आर्थिक विकास दर पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

ख़ून का हिसाब: प्रतिशोध की शपथ

खामेनेई ने अपने भाषण में मीनाब के शहीदों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनके खून का बदला लेने से ईरान कभी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अब देश की नई नीति प्रतिशोध और सुरक्षा पर आधारित होगी। ‘हम अपने शहीदों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं और किसी भी प्रकार के आतंक या हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के भीतर तथा सीमा पार पर हो रहे हमलों का जवाब देना अब उनकी प्राथमिकता होगी। इन बयानों को कई विश्लेषक ‘एक टर्निंग पॉइंट’ के रूप में देखते हैं, जहाँ ईरान ने अब अपने राष्ट्रीय हितों के लिए तलवार खींचने से भी पीछे नहीं हटने का संकेत दिया है।

अमेरिकी ठिकानों पर चेतावनी: बढ़ा हुआ जुबानी तनाव

मोजतबा खामेनेई के शब्दों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मौजूदा तनाव को और भी चरम पर ला खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों से ईरान पर लगातार नज़र रखी जा रही है और यदि आवश्यक हुआ तो वे उन ठिकानों को ‘ठीक उसी के समान’ निशाना बनाएँगे।

उनके इस बयान ने अमेरिका-ईरान के बीच पहले से ही बढ़ते राजनीतिक और सैन्य तनाव को और अधिक तेज़ कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने मानक प्रवक्ता चैनलों और मीडिया के माध्यम से उत्तर दिया कि वे ईरान की किसी भी आक्रामक हरकत को बर्दाश्त नहीं करेंगे, और अमेरिका अपने सहयोगियों और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

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