
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष का बजट पेश करते हुए रक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी है। रक्षा बजट में 15% की वृद्धि की गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करना बताया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सीमा सुरक्षा और आधुनिक हथियारों में निवेश बढ़ाने की दिशा में अहम है।
आयकर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कदम से आम नागरिकों की कर देनदारी पर कोई नया बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने कर राहत और छूट को बनाए रखने की बात कही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में इस बजट का सबसे बड़ा आकर्षण है कैंसर की 17 दवाओं को ड्यूटी फ्री करना। इससे इन दवाओं की कीमत में कमी आएगी और रोगियों के लिए इलाज सस्ता होगा। इसके साथ ही, सरकार ने तीन नए आयुर्वेदिक एम्स खोलने की घोषणा की है। इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा और नई स्वास्थ्य सुविधाएं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध होंगी।
बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना यात्रा समय कम करने, शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक होगी। रेल मंत्रालय का कहना है कि ये कॉरिडोर देश में हाईस्पीड ट्रेन नेटवर्क के विस्तार का आधार बनेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बजट न केवल सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है, बल्कि परिवहन और उद्योग क्षेत्र में भी विकास को प्रोत्साहित करता है। रक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा- तीनों क्षेत्र सरकार की रणनीति का केंद्र बने हुए हैं।
इस बजट से यह स्पष्ट है कि सरकार सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर दे रही है, जबकि आम नागरिकों पर कर बोझ बढ़ाने से बच रही है। आगामी वर्षों में इन नीतियों का प्रभाव देश के समग्र विकास पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।









