
हंगरी के विदेश मंत्री ने ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय यूनियन (EU) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड यूरोपीय यूनियन का विषय नहीं है और इस मुद्दे पर EU को हस्तक्षेप से बचना चाहिए। उनके इस बयान के बाद यूरोपीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
हंगरी के विदेश मंत्री ने कहा कि ग्रीनलैंड एक स्वायत्त क्षेत्र है, जो डेनमार्क के अधीन आता है और इसके भविष्य से जुड़े फैसले स्थानीय प्रशासन और डेनमार्क को लेने चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यूरोपीय यूनियन को ऐसे मुद्दों पर एकजुट राय बनाने से पहले सदस्य देशों की संप्रभुता और संवेदनशीलताओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक, EU को अपने मूल दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब ग्रीनलैंड अपने प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक स्थिति के कारण वैश्विक शक्तियों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जलवायु परिवर्तन के चलते बर्फ पिघलने से यहां नए व्यापारिक और सामरिक रास्ते खुलने की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से कई देश ग्रीनलैंड में रुचि दिखा रहे हैं, जिसे लेकर यूरोपीय संघ के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।
हंगरी के विदेश मंत्री के बयान को EU की एकजुट नीति के खिलाफ देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान यूरोपीय यूनियन के भीतर मतभेदों को उजागर करता है, खासकर तब जब संघ वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।









