
ग्रेटर नोएडा से सामने आए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर कर दिया है। पानी से भरे बेसमेंट में फंसने के बाद जान गंवाने वाले युवा इंजीनियर युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार युवराज की मौत दम घुटने (Asphyxia) से हुई, जो सीधे तौर पर यह साबित करता है कि समय रहते अगर रेस्क्यू और सुरक्षा इंतजाम होते, तो एक जान बचाई जा सकती थी।
घटना के दिन बेसमेंट में भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था। बताया जा रहा है कि युवराज वहां काम के सिलसिले में गया था, लेकिन जलभराव और खराब सुरक्षा व्यवस्था के चलते वह बाहर नहीं निकल सका। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर किसी तरह की गंभीर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे यह साफ है कि मौत किसी दुर्घटनावश चोट से नहीं, बल्कि लंबे समय तक ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हुई।
इस हादसे ने बिल्डरों, स्थानीय प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के मुताबिक बेसमेंट में जलनिकासी, इमरजेंसी एग्जिट और चेतावनी सिस्टम अनिवार्य होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर मानसून से पहले सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं कराया गया और जलभराव की शिकायतों को नजरअंदाज क्यों किया गया।
हादसे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। वहीं, युवराज मेहता के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
यह हादसा सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता है जो नियमों और जिम्मेदारियों को कागजों तक सीमित रखता है। अगर अब भी सबक नहीं लिया गया, तो ऐसे हादसे भविष्य में और जिंदगियां निगलते रहेंगे।









