
ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त धमकियों के बाद तेहरान ने अपना रुख नरम किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि “फांसी का कोई प्लान नहीं है” और “हैंगिंग आउट ऑफ द क्वेश्चन है”। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की फांसी की खबरें “मिसइनफॉर्मेशन कैंपेन” का हिस्सा हैं, जिसका मकसद अमेरिका को युद्ध में खींचना है।
ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें “दूसरी तरफ से बहुत महत्वपूर्ण सूत्रों” से जानकारी मिली है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुक गई हैं और कोई फांसी नहीं होगी। उन्होंने कहा, “किलिंग स्टॉप हो गई है… एक्जीक्यूशंस नहीं होंगी।” ट्रम्प ने सैन्य कार्रवाई को लेकर कहा कि वे “देखेंगे और इंतजार करेंगे” कि स्थिति आगे क्या होती है। इससे पहले ट्रम्प ने कई बार चेतावनी दी थी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देगा तो अमेरिका “बहुत मजबूत कार्रवाई” करेगा।
यह बदलाव तब आया जब एक 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी की फांसी की खबरें सामने आईं, जिसे मानवाधिकार संगठनों ने पहले प्रदर्शनकारी की मौत की सजा बताया था। ईरानी न्यायपालिका ने अब स्पष्ट किया कि सुल्तानी को मौत की सजा नहीं सुनाई गई और फांसी टाल दी गई है। प्रदर्शन दिसंबर अंत से शुरू हुए, जब ईरानी रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से आर्थिक संकट गहराया। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 2,400 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं, जबकि हजारों गिरफ्तार हैं। ईरान ने इंटरनेट ब्लैकआउट और हवाई क्षेत्र अस्थायी बंद करके स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
ट्रम्प की धमकी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा, जबकि ईरान ने अमेरिका पर “रिजीम चेंज” की साजिश का आरोप लगाया। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की अप्रत्याशित रणनीति ने तेहरान को पीछे हटने पर मजबूर किया, लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका ने मध्य पूर्व में कुछ सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की।









