
कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का नेटवर्क झारखंड से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश तक फैला हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडीकेट का संचालन वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद द्वारा किया जा रहा था। दोनों ने रांची में “मेसर्स शैली ट्रेडर्स” नाम से एक दवा फर्म खोलकर इस कथित अवैध कारोबार को अंजाम दिया।
सूत्रों के मुताबिक, कफ सिरप की बड़ी खेप को पहले झारखंड से पश्चिम बंगाल भेजा जाता था, जहां से इसे सीमा पार कराने की तैयारी की जाती थी। इसी दौरान केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने कई खेपों को सीमा पर पकड़ लिया। इसके बाद इस रैकेट के अन्य सदस्यों की भूमिका भी उजागर होने लगी।
ईडी की जांच में बताया गया है कि यह पूरा कारोबार एक सुनियोजित सिंडीकेट के तहत चलाया जा रहा था। शुभम को प्रति बोतल 500 रुपये तक का भुगतान मिलता था, जिससे उसने कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली। एजेंसियों का मानना है कि अवैध कमाई को अलग-अलग माध्यमों से खपाया गया और सहयोगियों के नाम पर निवेश भी किया गया।
इस मामले का खुलासा होने के बाद एफएसडीए ने झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्रवाई की थी। इसके आधार पर शुभम जायसवाल और उसके पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में जांच की कमान ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने संभाल ली।
फिलहाल शुभम जायसवाल फरार है, जबकि उसके नेटवर्क से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।









