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वेनेजुएला संकट पर भारत की चिंता लोगों की सुरक्षा को लेकर: एस जयशंकर

वेनेजुएला संकट पर भारत की चिंता लोगों की सुरक्षा को लेकर: एस जयशंकर
वेनेजुएला संकट पर भारत की चिंता लोगों की सुरक्षा को लेकर: एस जयशंकर
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Written by
Rishabh Rai

वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुए हालात को लेकर दुनियाभर के कई देशों ने चिंता जताई है। चीन समेत कई देशों ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है। इस बीच भारत ने भी स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा है कि इस पूरे संकट के बीच भारत की सबसे बड़ी चिंता वेनेजुएला के आम लोगों की सुरक्षा और भलाई को लेकर है।

मंगलवार (6 जनवरी) को लक्जमबर्ग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एस जयशंकर ने कहा कि भारत हालिया घटनाक्रमों को लेकर चिंतित है और सभी संबंधित पक्षों से अपील करता है कि वे आपस में बातचीत के जरिए समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि सभी पक्ष एक साथ बैठें और वेनेजुएला के लोगों के कल्याण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई रास्ता निकालें। जयशंकर ने यह भी बताया कि इस संबंध में भारत सरकार पहले ही एक आधिकारिक बयान जारी कर चुकी है।

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विदेश मंत्री ने वेनेजुएला के साथ भारत के पुराने और अच्छे संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत वेनेजुएला को एक ऐसे मित्र देश के रूप में देखता है, जिसके साथ उसके लंबे समय से मजबूत रिश्ते रहे हैं। ऐसे में वहां की राजनीतिक स्थिति चाहे जैसी भी हो, भारत की प्राथमिकता वहां के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस बीच विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा है कि वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम बेहद चिंताजनक हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और सभी पक्षों से शांति, स्थिरता और संवाद के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील करता है। कराकस स्थित भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के संपर्क में है और हरसंभव मदद दी जा रही है।

वैश्विक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में देश वही करते हैं, जिससे उन्हें सीधा फायदा होता है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार वैश्विक मंचों पर चिंता जताने वाले देश खुद अपने इलाकों में हिंसा और जोखिम पर सवाल नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि दुनिया के इस दोहरे रवैये को समझते हुए भारत को अपने हितों और मानवीय सरोकारों के साथ आगे बढ़ना होगा।

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