
ढाका के निकट नरसिंगड़ी जिले में एक हिंदू दुकानदार की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई। यह घटना 5 जनवरी 2026 की रात की है, जब 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि अपनी किराने की दुकान पर थे। अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर हमला किया और गंभीर रूप से घायल करने के बाद फरार हो गए। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, मणि ने 19 दिसंबर 2025 को फेसबुक पर एक पोस्ट किया था, जिसमें देश में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताते हुए लिखा था कि उनका जन्मस्थान “मृत्यु की घाटी” बन गया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह पोस्ट हमले का संभावित कारण हो सकता है, हालांकि पुलिस जांच कर रही है।
यह हत्या पिछले 18 दिनों में हिंदू समुदाय के सदस्यों पर हुई छठी घातक वारदात है। इसी दिन यशोवर जिले में हिंदू पत्रकार और व्यवसायी राणा प्रताप बैरागी की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले 3 जनवरी को खोकन दास को हमला कर जिंदा जला दिया गया था, जिनकी मौत हो गई। दिसंबर में भी कई हिंदू नागरिकों की हत्या या लिंचिंग की घटनाएं सामने आईं।
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमलों में वृद्धि देखी गई है। हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के अनुसार, अगस्त 2024 से अब तक सैकड़ों हमले हुए हैं, जिसमें मंदिरों और घरों को निशाना बनाया गया। अंतरिम सरकार ने इन घटनाओं की निंदा की है और जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल है।
भारत ने भी इन हमलों पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी ताकतों के उभार से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरिम सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। (शब्द: 498)
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले नहीं थम रहे: दुकानदार की हत्या से फिर दहशत, फेसबुक पोस्ट पर उठे सवाल
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की श्रृंखला जारी है। नरसिंगड़ी जिले के पलाश उपजिला में चरसिंदुर बाजार में 40 साल के शरत चक्रवर्ती मणि नाम के दुकानदार पर 5 जनवरी की रात धारदार हथियारों से हमला किया गया। हमलावरों ने उन्हें गंभीर रूप से जख्मी किया और भाग निकले। स्थानीय लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
यह घटना उसी दिन हुई जब यशोवर में हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी को गोली मारकर और गला रेतकर殺 कर दिया गया। इन दो हत्याओं से 18 दिनों में हिंदू समुदाय के छह सदस्यों की मौत हो चुकी है। पहले की घटनाओं में खोकन चंद्र दास को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया गया, जबकि अन्य मामलों में लिंचिंग और गोलीबारी शामिल है।
मणि के परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वे दक्षिण कोरिया में काम करके लौटे थे और साधारण जीवन जीते थे। लेकिन 19 दिसंबर को उनके फेसबुक पोस्ट में देश में फैली हिंसा पर अफसोस जताया गया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “इतनी आग, इतनी हिंसा… मेरा जन्मस्थान मृत्यु की घाटी बन गया।” कुछ सूत्रों का दावा है कि यह पोस्ट हमले की वजह हो सकती है।
शेख हसीना के जाने के बाद से बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूह सक्रिय हो गए हैं। अल्पसंख्यक संगठनों का कहना है कि हमले राजनीतिक या धार्मिक दोनों कारणों से हो रहे हैं। अंतरिम सरकार के सलाहकार इन घटनाओं को निंदनीय बता रहे हैं और सुरक्षा का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात नहीं सुधर रहे। भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी सांसदों ने ऐसी हिंसा की निंदा की है।









