
खांसी हमारे शरीर की एक प्राकृतिक रक्षा प्रक्रिया है। यह फेफड़ों और श्वसन मार्ग को साफ रखने का काम करती है। जब कोई जलन पैदा करने वाला तत्व—like धूल, धुआं, बैक्टीरिया या वायरस—वायुमार्ग में प्रवेश करता है, तो शरीर खांसी के जरिए उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है। सामान्यतः खांसी दो प्रकार की होती है: सूखी खांसी (बिना बलगम वाली) और बलगम वाली (प्रोडक्टिव) खांसी। बलगम वाली खांसी में फेफड़ों से म्यूकस या बलगम बाहर निकलता है, जो संक्रमण या जलन के कारण बढ़ जाता है।
खांसी के मुख्य कारणों में सर्दी-जुकाम, फ्लू, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, एलर्जी, धूम्रपान, एसिड रिफ्लक्स और प्रदूषण शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज), निमोनिया या फेफड़ों की अन्य बीमारियों का संकेत हो सकती है।
अब सवाल यह है कि फेफड़ों में जमा बलगम खतरनाक है या नहीं? बलगम (म्यूकस) वास्तव में हमारे लिए फायदेमंद है। यह फेफड़ों की दीवारों पर एक पतली परत बनाता है, जो धूल, कीटाणुओं और जलन पैदा करने वाले कणों को फंसाकर उन्हें बाहर निकालने में मदद करता है। खांसी के जरिए बलगम निकलना शरीर की सफाई प्रक्रिया है। सामान्य मात्रा में यह हानिरहित और जरूरी है।
लेकिन क्या फेफड़ों में जमा बलगम हमेशा सुरक्षित है? नहीं। सामान्य बलगम पारदर्शी या सफेद होता है और हानिरहित। संक्रमण होने पर यह पीला या हरा हो जाता है, जो बैक्टीरियल इंफेक्शन का संकेत है। ज्यादा जमा होने पर यह वायुमार्ग को ब्लॉक कर सकता है, सांस की तकलीफ पैदा कर सकता है। क्रॉनिक मामलों में—like अस्थमा, COPD या सिस्टिक फाइब्रोसिस में—बलगम गाढ़ा होकर फेफड़ों में फंस जाता है, जिससे बार-बार संक्रमण होता है और फेफड़े क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
संक्षेप में, खांसी और बलगम शरीर के सुरक्षा कवच हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज न करें। स्वस्थ जीवनशैली, पर्याप्त पानी पीना और धूम्रपान छोड़ना इन समस्याओं से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।
फेफड़े हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हैं, जो ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए प्रकृति ने एक खास व्यवस्था की है—बलगम या म्यूकस। यह चिपचिपा पदार्थ फेफड़ों और श्वसन नलियों में बनता है, जो हवा में मौजूद कीटाणुओं, धूल और प्रदूषकों को फंसाता है। जब बलगम बढ़ता है, तो खांसी आती है, जो इसे बाहर निकालकर फेफड़ों को साफ रखती है। इस तरह खांसी एक सुरक्षा तंत्र है, जो संक्रमण से बचाती है।
लेकिन क्या फेफड़ों में जमा बलगम हमेशा सुरक्षित है? नहीं। सामान्य बलगम पारदर्शी या सफेद होता है और हानिरहित। संक्रमण होने पर यह पीला या हरा हो जाता है, जो बैक्टीरियल इंफेक्शन का संकेत है। ज्यादा जमा होने पर यह वायुमार्ग को ब्लॉक कर सकता है, सांस की तकलीफ पैदा कर सकता है। क्रॉनिक मामलों में- like अस्थमा, COPD या सिस्टिक फाइब्रोसिस में-बलगम गाढ़ा होकर फेफड़ों में फंस जाता है, जिससे बार-बार संक्रमण होता है और फेफड़े क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
खांसी के आम कारण वायरल इंफेक्शन, एलर्जी या धूम्रपान हैं। अगर बलगम में खून आए, भूरा या काला हो, या खांसी लंबे समय तक चले, तो यह टीबी, फेफड़ों का कैंसर या हार्ट फेल्योर जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है। ऐसे में देरी न करें, डॉक्टर से सलाह लें।
बचाव के लिए: ज्यादा पानी पिएं, नमीयुक्त वातावरण रखें, धूम्रपान त्यागें और संक्रमण से बचें। बलगम और खांसी को समझकर हम अपने फेफड़ों की बेहतर देखभाल कर सकते हैं। स्वस्थ फेफड़े ही स्वस्थ जीवन की कुंजी हैं।







