Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

संपादकीय: कब रुकेगा दहेज का यह वहशी नाटक?

निक्की भाटी
निक्की भाटी
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

21 अगस्त 2025 की रात ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर सिर्फ आग नहीं लगी थी, वह चीख थी उस व्यवस्था की, जो आज भी महिलाओं को ‘दहेज की कीमत’ से आंकती है। निक्की भाटी का बेरहमी से पीटकर फिर जिंदा जलाया जाना कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि उस सामाजिक सड़न का भयानक प्रदर्शन है, जो भारत के हर कोने में अब भी सांसें ले रहा है. खुलेआम, बेलौस, बेशर्म।

निक्की की हत्या का मामला सिर्फ एक “दहेज हत्या” नहीं है- यह हमारे कानून, हमारी सामाजिक चेतना और हमारे पारिवारिक ढांचे पर एक तमाचा है। एक पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर युवती, जिसने एक ब्यूटी पार्लर चलाया, इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान बनाई, और दो बच्चों की मां बनकर भी अपने सपनों को नहीं छोड़ा, वही युवती आखिरकार उस घर में मार दी गई जहां उसे सबसे ज़्यादा सुरक्षित होना चाहिए था।

Advertisement Box

आज, जबकि हम चंद्रयान की सफलता और डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, वहीं घरों में बेटियां अब भी जल रही हैं — कभी गैस सिलेंडर की “दुर्घटना” बनकर, तो कभी चरित्र के सवालों में उलझकर। निक्की को इसलिए मारा गया क्योंकि वह ‘बहू’ थी, एक कमाऊ स्त्री थी, और क्योंकि वह किसी के झूठे अहम को झेलने के लिए चुप नहीं बैठी।

इस मामले में जो सबसे अधिक भयावह है, वह है परिवार की मिलीभगत। पति ही नहीं, जेठ, सास, ससुर,सबने मिलकर यह क्रूर षड्यंत्र रचा। सोचिए, एक 5 साल का मासूम बच्चा अपनी मां को जिंदा जलते देख रहा था। यह एक नहीं, दो पीढ़ियों की आत्मा को जलाने वाला दृश्य है।

क्या हमारे कानून पर्याप्त हैं?

दहेज निषेध अधिनियम 1961 हो या IPC की धारा 498A — कागज़ों में ये सशक्त दिखते हैं। लेकिन क्या जमीनी हकीकत भी उतनी ही सशक्त है? क्यों एक युवती को 9 साल तक लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ी? क्यों शिकायत के बावजूद कार्यवाही नहीं हुई? क्या महिला सुरक्षा सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गई है?

अब क्या?

यदि निक्की को न्याय नहीं मिला, तो यह समाज की हार होगी।

यदि आरोपी कुछ वर्षों में जमानत पर छूट गए, तो यह कानून की विफलता होगी।

यदि हम चुप रहे, तो अगली निक्की हमारे पड़ोस की हो सकती है।

समाज को अब यह फैसला करना होगा कि वह किस ओर खड़ा है, उस परंपरा के साथ जो बेटियों को बोझ समझती है, या उस बदलाव के साथ जो उन्हें बराबरी और गरिमा का हक देता है। “दहेज सिर्फ लेन-देन नहीं, यह हत्या की शुरुआत है। अब समय है कि हम यह सौदा हमेशा के लिए बंद करें।”

आज का राशिफल

वोट करें

आमिर की अगली फिल्म 'सितारे जमीन पर' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ। क्या यह फिल्म आमिर को बॉक्स ऑफिस पर सफलता दिला पाएगी?

Advertisement Box

और भी पढ़ें

WhatsApp