
नई दिल्ली, ब्यूरो |
अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ प्रमुख उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में अचानक आई तल्ख़ी का संकेत माना जा रहा है। वाइट हाउस के इस कदम से भारतीय व्यापार जगत में चिंता की लहर दौड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने यह टैरिफ टेक्सटाइल, स्टील, फार्मा और कुछ आईटी प्रोडक्ट्स पर लगाया है। इस कदम से भारत को हर साल हज़ारों करोड़ रुपये के निर्यात घाटे का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका का तर्क:
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह टैरिफ “डंपिंग और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेस” के खिलाफ लगाया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने दावा किया कि भारत कुछ उत्पादों पर सब्सिडी देकर अमेरिकी मार्केट को प्रभावित कर रहा है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने अमेरिका के इस कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह निर्णय WTO के नियमों के खिलाफ है। हम इसका उचित जवाब देंगे।”
आर्थिक असर
भारतीय स्टील इंडस्ट्री को 7,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हो सकता है टेक्सटाइल सेक्टर की अमेरिका में हिस्सेदारी 30% घटने की आशंका. फार्मा कंपनियों को अमेरिका में FDA अप्रूवल मिलने में और देरी हो सकती है
क्या ये सिर्फ व्यापारिक विवाद है या चीन को घेरने की रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम सिर्फ भारत को लेकर नहीं है। यह एक वैश्विक व्यापार रणनीति का हिस्सा है जिसमें अमेरिका एशियाई देशों पर दबाव बनाकर “मेक इन USA” अभियान को बढ़ावा देना चाहता है।
राजनीतिक विश्लेषक संजय भट्ट कहते हैं: “ट्रम्प या बाइडेन — दोनों ही प्रशासन घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रहे हैं। भारत को अब अपने निर्यात के नए रास्ते तलाशने होंगे।”









