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राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा से बातचीत…. रोजगार, शिक्षा नीति, राजनीतिक दृष्टिकोण और बिहार चुनाव पर चर्चा

Dinesh Sharma's podcast is being released today... only on Avadh Sutra and Navratna Bharat
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा का राजनीतिक जीवन जितना सक्रिय रहा है, उतना ही उनका झुकाव शिक्षा और नीति-निर्माण की ओर भी स्पष्ट दिखाई देता है। दिल्ली में एक विशेष बातचीत के दौरान डॉ. शर्मा ने शिक्षा, रोजगार, युवाओं की भागीदारी और बिहार चुनाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।

शिक्षा केवल डिग्री नहीं, चरित्र निर्माण का माध्यम है

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डॉ. शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि… “देश तभी प्रगति करेगा जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा गांव-गांव तक पहुँचेगी।”उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को भारत के लिए एक नींव निर्माण की नीति बताया। उनके अनुसार, अब शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि कौशल, संस्कार और जीवन मूल्यों से जुड़ी हुई है। स्कूलों का मर्जर व्यावहारिक निर्णय हो सकता है, लेकिन यह ज़रूरी है कि उसे स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में देखा जाए, न कि केवल आंकड़ों के आधार पर।

रोजगार के लिए मानसिकता में बदलाव ज़रूरी

रोजगार के मुद्दे पर डॉ. शर्मा ने कहा कि…रोजगार केवल सरकारी नौकरी में नहीं है, हमें आत्मनिर्भर युवाओं की आवश्यकता है… उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया जैसी योजनाओं को सकारात्मक बदलाव की दिशा बताया और कहा कि अब युवा फिनटेक, एग्रीटेक और MSME जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं…हमें नौकरी ढूंढ़ने वाले नहीं, नौकरी देने वाले युवाओं की ज़रूरत है।

राजनीति में सेवा भाव की आवश्यकता

डॉ. शर्मा ने अपने राजनीतिक जीवन को सत्ता नहीं, सेवा की यात्रा बताया…राजनीति मेरे लिए जनता की समस्याओं का समाधान करने का माध्यम है। केवल भाषण से नहीं, नीति और क्रियान्वयन से बदलाव आता है… वह लखनऊ के दो बार महापौर रह चुके हैं, फिर डिप्टी सीएम के रूप में उन्होंने नगर विकास, उच्च शिक्षा और वित्त जैसे विभागों में कार्य किया और अब राज्यसभा में शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

विश्वविद्यालयों में राजनीति: चेतना हो, कट्टरता नहीं

डॉ. शर्मा का मानना है कि… छात्र राजनीति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसमें मर्यादा होनी चाहिए.. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को विचार और संवाद के केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि टकराव और अराजकता के स्थान के रूप में।

बिहार चुनाव पर बोले – “जनता ने तय कर लिया है”

बिहार चुनाव को लेकर डॉ. शर्मा ने आत्मविश्वास के साथ कहा… इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA को बहुमत मिलेगा… जनता का भरोसा हमारे काम पर है, विपक्ष केवल शोर कर रहा है। उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए SIR (Special Investigation Report) के मुद्दे को लेकर कहा…यह चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, और आयोग निष्पक्ष रूप से कार्य कर रहा है। विपक्ष इसे जानबूझकर राजनीतिक रंग दे रहा है, जबकि जनता मुद्दों की गंभीरता को भली-भांति समझती है…

युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश

अंत में डॉ. शर्मा ने देश के युवाओं से आह्वान किया…शिक्षा, कौशल और मूल्यों के साथ आगे बढ़ें। देश निर्माण केवल नारों से नहीं, कार्य और सोच से होता है… डॉ. दिनेश शर्मा की यह बातचीत बताती है कि वे केवल नेता नहीं, बल्कि शिक्षा और नीति के गंभीर चिंतक भी हैं। उनके विचार वर्तमान समय में शिक्षा, रोजगार और राजनीति के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

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