
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम पर मुहर लगाई है। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है।भाजपा की जारी सूची में संगठन से जुड़े नेताओं के साथ सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है। सूची में दो महिला उम्मीदवारों प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को जगह मिली है। वहीं धर्मपाल सिंह और राम प्रताप सिंह चौहान जैसे संगठन में सक्रिय नेताओं को राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है।

इन आठ नेताओं को मिला टिकट
भाजपा ने प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर और गोपी कृष्ण पांडेय को भी राज्यसभा का टिकट मिला है। पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत के साथ राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को भी उम्मीदवार बनाया गया है।राम प्रताप सिंह चौहान को आगरा से प्रत्याशी बनाया गया है। वह प्रदेश महामंत्री के तौर पर संगठन में सक्रिय हैं। धर्मपाल सिंह भी पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ऐसे में सूची में संगठन के अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आ रही है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
भाजपा की सूची में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आठ उम्मीदवारों में तीन ओबीसी, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग से हैं। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। ओबीसी वर्ग में लोधी, पाल और कुर्मी समाज से जुड़े चेहरों को जगह दी गई है। विद्यासागर सोनकर को भी पार्टी ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वह पूर्वांचल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं और पहले विधान परिषद सदस्य भी रह चुके हैं। वहीं सूची में ब्राह्मण और राजपूत समाज से जुड़े नेताओं को भी प्रतिनिधित्व मिला है। इस तरह पार्टी ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार चुनते समय सामाजिक विविधता को ध्यान में रखा है।
दो मौजूदा नेताओं को नहीं मिला टिकट
भाजपा की सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम नहीं है। दोनों को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन पार्टी ने इस बार नए और संगठन से जुड़े चेहरों पर भरोसा जताया है।
पार्टी के इस फैसले को संगठन में सक्रिय नेताओं को आगे बढ़ाने के कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा की ओर से उम्मीदवारों के चयन के पीछे अलग-अलग नेताओं के संबंध में कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
2027 से पहले अहम फैसला
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने एक तरफ संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं को मौका दिया है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग सामाजिक वर्गों और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक संतुलन बनाने की कोशिश की है।उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि मतदान 16 अक्टूबर को होगा। विधानसभा में भाजपा की संख्या को देखते हुए पार्टी के कई उम्मीदवारों की जीत की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
भाजपा की आठ नामों वाली सूची ने प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। खासतौर पर संगठन के नेताओं को मिली प्राथमिकता और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। अब सभी की नजरें नामांकन प्रक्रिया और चुनाव के दौरान होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेंगी।







