
राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने संबंधी विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि सीईसी ने अपने कार्यकाल में पक्षपात और भेदभाव किया, इसी आधार पर उन्हें हटाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में 1 मार्च को पेश किया गया था।
इस प्रस्ताव के नोटिस पर 130 लोकसभा सदस्य और 63 राज्यसभा सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। हस्ताक्षरकर्ताओं में ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी घटक दल शामिल थे, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के सदस्य, जो औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी नोटिस पर हस्ताक्षर किए।
नियमों के अनुसार, लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला नोटिस ही वैध माना जाता है। इस नोटिस को संसद में पेश किया गया था और सभापति ने इसकी जांच के बाद इसे खारिज कर दिया।
राज्यसभा के इस निर्णय के बाद विपक्षी दलों ने इसे आलोचना का विषय बनाया है और कहा है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि प्रस्ताव को खारिज करना न्यायसंगत नहीं है और इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। इस मामले ने संसद में CEC के पद और उसकी स्वतंत्रता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है







