
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, हाल ही में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण चर्चा में रहा। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों के बाद, ईरान ने जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए थे। इससे भारत और अन्य देशों की ऊर्जा आपूर्ति खतरे में पड़ गई थी। लेकिन अब AIS और रिमोट सेंसिंग डेटा से सामने आया है कि इस जलडमरूमध्य में एक नया समुद्री मार्ग खुला है, जो अंतरराष्ट्रीय जल सीमा से बचते हुए ओमान की सीमा में स्थित है।
इस मार्ग से गुजरने वाले प्रमुख जहाजों में मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले क्रूड ऑयल टैंकर “हाब्रुत” और “धलकुट”, पनामा के झंडे वाला एलएनजी कैरियर “सोहार” और भारतीय झंडे वाला कार्गो जहाज “एमएसवी क्यूबा एमएनवी 2183” शामिल हैं। टैंकरट्रैकर्स के मुताबिक, इन टैंकरों में लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल भरा हुआ था, जबकि एलएनजी कैरियर ने यूएई से अपनी यात्रा शुरू की थी।
विशेषज्ञ बताते हैं कि नया मार्ग पारंपरिक होर्मुज मार्ग और ईरान द्वारा बनाए गए पुराने नियंत्रण मार्ग से अलग है। यह मार्ग ओमान की समुद्री सीमा में है, जिससे जहाजों को अपेक्षाकृत सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जहाजों ने मस्कट से करीब 350 किलोमीटर दूर अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए थे, जो सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है।
ईरान ने हाल ही में क़ेश्म और लारक द्वीपों के बीच एक नया मार्ग बनाया है, जिसमें IRGC जहाजों की पहचान कर उन्हें केस-बाय-केस अनुमति देता है। इसके साथ ही, प्रति बैरल तेल पर शुल्क वसूलता है। इस कदम से ईरान को नियंत्रण का लाभ मिला है, लेकिन व्यापारिक जहाज अब इस मार्ग का उपयोग करके सुरक्षित रूप से ऊर्जा माल ले जा पा रहे हैं।
विश्लेषक मानते हैं कि इस मार्ग के खुलने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आएगी। भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाज इस मार्ग से गुजरकर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित रख पाएंगे। साथ ही, ईरान के IRGC अड्डे पर हुए धमाकों और आग की घटनाओं के बावजूद, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बनी हुई है। यह संकेत है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक गतिविधियाँ धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रही हैं।





