
विदेश सचिव मिसरी ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन को संबोधित किया
नई दिल्ली । विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित किया। मिसरी ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने और हथियारों की होड़ को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने सैन्य आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के जिम्मेदार उपयोग और रक्षा क्षेत्र में विश्वसनीय एआई के मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय ढांचे के प्रति देश की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विदेश सचिव के वर्चुअल संबोधन की प्रमुख बातें सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने बताया कि सचिव मिसरी ने स्ट्रेटेजिक स्टेबिलिटी बनाए रखने, हथियारों की होड़ को रोकने और एक यूनिवर्सल तथा बिना भेदभाव वाले वेरिफाएबल न्यूक्लियर निरस्त्रीकरण हासिल करने पर बल दिया। उन्होंने ‘वेपन्स ऑफ मास डिस्ट्रक्शन’ से जुड़े आतंकवाद के बढ़ते खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया।
विदेश सचिव ने कहा नई सामरिक शस्त्र कटौती संधि (न्यू स्टार्ट) की समाप्ति वैश्विक शस्त्र नियंत्रण के लिए एक बड़ा झटका है। भारत का मानना है कि वैश्विक सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना और हथियारों की होड़ को रोकना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत की परमाणु नीति को दोहराते हुए मिसरी ने कहा कि एक जिम्मेदार परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में विश्वसनीय न्यूनतम निवारक क्षमता बनाए रखना हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने चरणबद्ध बहुपक्षीय ढांचे के माध्यम से सार्वभौमिक, गैर-भेदभावपूर्ण और सत्यापन योग्य परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने सम्मेलन में जनादेश के आधार पर विखंडनीय पदार्थ अवरोध संधि पर वार्ता के लिए भी समर्थन व्यक्त किया।
विदेश सचिव मिसरी ने कहा भारत सैन्य क्षेत्र में एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। जोखिमों को कम करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एआई के उपयोग में मानवीय निर्णय और निगरानी आवश्यक है। भारत ने विश्वसनीयता, सुरक्षा और पारदर्शिता के आधार पर रक्षा क्षेत्र में विश्वसनीय एआई का मूल्यांकन करने के लिए एक ढांचा विकसित किया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों से संबंधित निर्णय मानवीय नियंत्रण में रहेंगे।
विदेश सचिव ने ग्लोबल साउथ के हितों को बढ़ावा देने के लिए भारत की पहलों के बारे में भी बताया। इन पहलों में विकास, समावेशन और लोकतांत्रिक पहुंच के लिए एआई के उपयोग पर केंद्रित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 शामिल हैं।









