
वॉशिंगटन- अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 20 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा टैरिफ नीति को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने 6-3 के फैसले में कहा कि ट्रंप ने 100 से अधिक देशों से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाते समय अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने बहुमत का फैसला लिखते हुए कहा, राष्ट्रपति असीमित मात्रा, अवधि और दायरे में टैरिफ लगाने की असाधारण शक्ति का दावा नहीं कर सकते। इस तरह की शक्ति के लिए कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति आवश्यक है। जस्टिस क्लैरेंस थॉमस, सैमुअल ए. एलिटो जूनियर और ब्रेट एम. कैवनॉ ने फैसले से असहमति जताई।
ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का हवाला देते हुए टैरिफ लगाए थे। उनका कहना था कि यह कदम अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए जरूरी था। प्रशासन ने यह भी बताया कि टैरिफ से सरकार को राजस्व प्राप्त होता और दूसरे देशों के साथ व्यापार वार्ता में दबाव बनाने में मदद मिलती।
हालांकि, प्रभावित व्यवसायों और राज्यों ने अदालत में दलील दी कि राष्ट्रपति ने संविधान के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार छीन लिया। आयातित वस्तुओं पर निर्भर व्यवसायों ने कहा कि टैरिफ के कारण उनके संचालन में बाधा आई, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ीं और कर्मचारियों की संख्या में कटौती करनी पड़ी। अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय माना।
इससे पहले, तीन निचली अदालतों ने भी ट्रंप के टैरिफ को अवैध ठहराया था। फेडरल सर्किट अपील अदालत ने 7-4 के फैसले में कहा कि आपातकालीन कानून राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब कांग्रेस किसी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देना चाहती है, तो वह ऐसा स्पष्ट रूप से करे।
इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को अन्य कानूनों के तहत टैरिफ लगाने के विकल्प तलाशने होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय अमेरिकी अर्थव्यवस्था, उपभोक्ताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।इस मामले से स्पष्ट होता है कि अमेरिका में राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा संवैधानिक रूप से सुनिश्चित है और कांग्रेस की मंजूरी के बिना कोई भी आर्थिक निर्णय व्यापक प्रभाव डालने वाला नहीं हो सकता।








