
पुलिस का मास्टर प्लान: अब साइबर मुख्यालय में बैठेंगे बैंकों के प्रतिनिधि, सेकंडों में होल्ड होगा पैसा
भोपाल। साइबर ठगी की घटनाओं में राशि तुरंत होल्ड करने के लिए साइबर पुलिस मुख्यालय नई व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। यहां बनाए गए मिटिगेशन केंद्र में बैंकों के प्रतिनिधियों को भी बैठाने की तैयारी है, जिससे ठगी गई राशि तुरंत होल्ड करने में मदद मिल सके। प्रतिनिधियों के बैठने से फोन और ई-मेल पर जाने वाला समय बचेगा। पुलिस और बैंक प्रतिनिधि एक जगह रहने से समन्वय भी बेहतर रहेगा। वे तुरंत एक-दूसरे को जानकारी साझा कर सकेंगे। इससे राशि को सात-आठ लेयर तक रोकने में सफलता मिल सकेगी। बता दें कि मिटिगेशन सेंटर लगभग छह माह से काम कर रहा है। अब इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आइ4सी) के साइबर फ्राड मिटिगेशन सेंटर की तरह तैयार किया जा रहा है। साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि उन बैंकों के प्रतिनिधियों को बैठाने का प्रयास किया जा रहा है, जिनमें ठगी की राशि अधिक पहुंच रही है। प्राथमिकता के अनुसार ऐसे करीब 20 बैंकों का नाम चिह्नित किया गया है। इसके अतिरिक्त पांच डिजिटल पेमेंट बैंक के प्रतिनिधियों को भी बैठाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार साइबर ठगी की शिकायतें सुबह के समय अधिक आती हैं, इसलिए बैंक प्रतिनिधि सुबह की पाली में ही दो से चार घंटे के बीच बैठेंगे। इसके अतिरिक्त टेलीकाम कंपनियों से भी साइबर मुख्यालय का अनुबंध है जिससे मोबाइल नंबर धारक की जानकारी तुरंत मिल जाती है। 35 प्रतिशत तक राशि होल्ड कराने का है लक्ष्य एसपी साइबर मुख्यालय प्रणय नागवंशी ने बताया कि अभी हम 22 प्रतिशत तक राशि होल्ड करा रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य है। इसके लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मिटीगेशन सेंटर को भी सुदृढ करने का प्रस्ताव है। देश में सर्वाधिक राशि होल्ड कराने के मामले में मध्य प्रदेश अभी छठवें क्रम पर है। 35 प्रतिशत तक राशि होल्ड होने पर पहले-दूसरे नंबर पर आ सकता है। बता दें कि वर्ष 2025 में साइबर ठगी की 55 हजार 659 शिकायतें आई थीं। इनमें 634 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी, जिसमें 137 करोड़ रुपये होल्ड कराने में सफलता मिली थी।








