
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राज्यसभा में एक व्यापक और निर्णायक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने देश की आर्थिक, सामाजिक और नीति निर्माण की दिशा में हुई उपलब्धियों को रेखांकित किया। उनका भाषण न केवल भारत की प्रगति को उजागर करता है, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण और विपक्ष के प्रति उनकी ठोस राय को भी स्पष्ट करता है।
प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत देश की सामर्थ्य और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति के महत्व पर जोर देते हुए की। उन्होंने कहा कि देश तब वैश्विक साझेदारी में आगे बढ़ सकता है, जब उसके पास आर्थिक ताकत, नागरिकों में देशभक्ति की ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग के लिए मजबूत इको-सिस्टम मौजूद हो। पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि वोट बैंक की राजनीति में डूबे नेताओं ने कभी देश की इन आवश्यकताओं को प्राथमिकता नहीं दी।
नीति आयोग और प्लानिंग कमीशन
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में प्लानिंग कमीशन और नीति आयोग के मुद्दे पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जिस प्लानिंग कमीशन की आलोचना इंदिरा गांधी कर रही थीं, उसका जन्म उनके पिता, जवाहरलाल नेहरू, के समय हुआ था। 2014 तक यह संस्था अस्तित्व में थी, लेकिन उसे सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने इसे अटकाना, लटकाना और भटकाना जैसी कार्यशैली में बदल दिया था। 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने इसे समाप्त कर नीति आयोग की स्थापना की। नीति आयोग का उद्देश्य केवल योजना बनाना नहीं, बल्कि उसे निष्पादन योग्य और परिणाममुखी बनाना है।
कृषि क्षेत्र और छोटे किसानों पर ध्यान
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में छोटे किसानों के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 10 करोड़ ऐसे किसान हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर से कम भूमि है। इन किसानों की समस्याओं पर कभी भी ध्यान नहीं दिया गया। कांग्रेस का दृष्टिकोण बड़े किसानों के साथ काम करने तक सीमित था। मोदी ने यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने छोटे किसानों को प्राथमिकता दी, और उनकी वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया।प्रधानमंत्री ने वित्तीय क्षेत्र में की गई उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बैंकों को उनके पुराने ऋण और गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) की समस्या से मुक्त किया। मुद्रा योजना के तहत 30 लाख करोड़ रुपये के लोन देकर व्यवसायों और छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाया गया।
सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे पर कड़ा रुख
मोदी ने भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि घुसपैठिए देश के नौजवानों की नौकरियां छीन रहे हैं और आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। इसके बावजूद विपक्ष उनकी आलोचना कर रहा है और न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा उनकी प्राथमिकता है।
अंतरराष्ट्रीय संबंध और व्यापार
प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ हालिया ट्रेड डील का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है। इस डील का सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिलेगा। इसके अलावा, भारत के प्रोफेसर्स और उच्च शिक्षण संस्थानों को भी वैश्विक स्तर पर बड़े अवसर प्राप्त होंगे। मोदी ने यह संदेश दिया कि उनकी सरकार केवल घरेलू मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है।
कांग्रेस और विपक्ष पर तीखे प्रहार
प्रधानमंत्री ने भाषण में कांग्रेस पार्टी पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लेकर दुनिया में जो छवि है, उसे सुधारने में उन्हें अधिक समय लग रहा है। मोदी ने कांग्रेस के पुराने भाषणों का हवाला देते हुए कहा कि उनमें कोई सोच, विज़न या इच्छाशक्ति दिखाई नहीं देती थी। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अब देश नीति आधारित प्रशासन की ओर बढ़ रहा है, और विपक्ष को भी इसके अनुरूप जवाबदेही निभानी होगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्ष ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। यह संकेत देता है कि विपक्ष अभी भी सरकार की नीतियों और उसके दृष्टिकोण के साथ असहमति में है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने यह दिखाया कि उनकी सरकार विरोधियों की आलोचना से विचलित नहीं होती और देश के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित रखती है।








