
इंदौर। शहर में दूषित पानी के चलते बढ़ती मौतों के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल मचा दी है। 15वीं मौत की खबर के बीच, हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने कहा कि अब तक चार लोगों की ही मौत हुई है। यह बयान आम जनता के बीच असंतोष और विरोध को और बढ़ा रहा है।
विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर डबल इंजन सरकार की लापरवाही और जनता के प्रति बेपरवाही का नतीजा है। उन्होंने इसे हत्या के समान गंभीर प्रशासनिक चूक करार दिया।
इसी बीच, नगर निगम ने इंदौर के निगम कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है। अधिकारियों को 48 घंटे में इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
नागरिकों ने भी इस मामले में चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी से होने वाली बीमारियां केवल कमजोर वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे शहर के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा कर रही हैं।
नगर निगम ने पानी की सप्लाई को लेकर अलर्ट जारी किया है और लोग फिलहाल उबला या बोतलबंद पानी ही पी रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन नागरिकों का विश्वास पहले की तरह नहीं बन पाया है।






