
लखनऊ: नए साल 2026 की शुरुआत उत्तर प्रदेश में आस्था और भक्ति के रंग में हुई। अयोध्या के राम मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा-वृंदावन के बांके बिहारी व कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ठंड और कोहरे के बावजूद लाखों भक्तों ने दर्शन कर नववर्ष की शुभ शुरुआत की। यूपी सरकार ने इसे सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बताया, खासकर युवाओं में धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ते रुझान को।
अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए 2-3 किमी लंबी कतारें लगीं। हनुमान गढ़ी और सरयू घाट पर भी भक्तों की भीड़ थी। पिछले तीन दिनों में 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की, लेकिन दर्शन के लिए 10 सेकंड से कम समय मिला। एक भक्त नंदिनी जोशी ने कहा, “लंबे समय से प्लान था, नए साल की शुरुआत आरती और दर्शन से की, व्यवस्था सराहनीय थी।”
वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में पिछले सप्ताह 20 लाख और नए साल पर लाखों भक्तों ने मत्था टेका। दर्शन के लिए 5 घंटे इंतजार, स्पर्श दर्शन निलंबित। गंगा घाटों पर विशेष आरती हुई। मंदिर सीईओ विश्व भूषण मिश्र ने कहा, “सनातन संस्कृति उत्सव और उल्लास की आश्रयस्थली है।”
मथुरा-वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर पर पैर रखने की जगह नहीं। 3 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, होटल रेट 30% बढ़े। मंदिर प्रशासन ने 5 जनवरी तक न आने की अपील की। गुजरात से आई छंचल ने कहा, “कृष्ण दर्शन से साल की शुरुआत शांति देती है।”
युवाओं का रुझान क्लब-पार्टी से मंदिरों की ओर बदला। सोशल मीडिया पर #SpiritualNewYear ट्रेंड कर रहा। योगी सरकार के प्रयासों से धार्मिक पर्यटन बढ़ा। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए। यह नए साल की आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक बना।







