
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर सुपरपावर देशों की होड़ तेज हो गई है। खासकर अमेरिका और चीन के बीच चल रही यह तकनीकी रेस अब वैश्विक चिंता का विषय बन गई है। सैन्य-तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रही, बल्कि आने वाले समय में युद्ध के मैदान में AI यह तय करेगा कि कौन जिंदा रहेगा और कौन मरेगा।
हाल में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश ऐसे हथियार विकसित करने में लगे हैं जो बिना मानव हस्तक्षेप के लक्ष्य को पहचानकर हमला करने में सक्षम होंगे। इसमें ड्रोन स्वॉर्म, स्वायत्त मिसाइलें और AI-आधारित युद्ध प्रबंधन सिस्टम शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव निर्णय की जगह मशीन निर्णय आने का मतलब है- “जंग इंसानों के हाथ से निकलकर एल्गोरिद्म के हाथ में चली जाएगी।”
पूर्व सैन्य रणनीतिकारों ने चेतावनी दी है कि AI आधारित हथियारों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि इंसान प्रतिक्रिया देने से पहले ही मशीन फैसला ले लेती है। ऐसे में जरा सी तकनीकी त्रुटि भी बड़े पैमाने पर विनाश कर सकती है। उनका कहना है कि आने वाले दशक में युद्ध की रूपरेखा पूरी तरह बदल सकती है- मैदान में सैनिकों की जगह मशीनें होंगी और कमांड सेंटर में बैठा इंसान सिर्फ स्क्रीन पर आंकड़े देखता रह जाएगा।
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों ने यह कहते हुए विरोध जताया है कि “किलर रोबोट” जैसे हथियार मानव नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि किसी इंसान की मौत का फैसला कभी भी मशीन को नहीं सौंपा जाना चाहिए।









