Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

वंदे मातरम् – 150 वर्षों का गौरव और हमारी राष्ट्रभक्ति

वंदे मातरम् – 150 वर्षों का गौरव और हमारी राष्ट्रभक्ति
वंदे मातरम् – 150 वर्षों का गौरव और हमारी राष्ट्रभक्ति
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ ने 150 वर्षों तक देशवासियों के हृदय में गर्व, एकता और देशभक्ति की भावना को जीवित रखा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत सिर्फ शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन और भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक रहा है। 1896 में कोलकता के कांग्रेस अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया। इसके बाद 1905 में बंगाल विभाजन के समय और हमारे वीर क्रांतिकारियों की अंतिम साँसों तक, यह गीत हर भारतीय के मन में देशभक्ति की ज्वाला जलाता रहा।

वंदे मातरम् ने लाला लाजपत राय, भीकाजी कामा, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और महात्मा गांधी जैसे अनेक क्रांतिकारियों के हौसले को बढ़ाया। महात्मा गांधी ने इसे साम्राज्यवाद-विरोधी नारे के रूप में वर्णित किया, जबकि पंडित नेहरू ने इसे भारतीय राष्ट्रवाद से सीधे जोड़कर देखा। 1937 में कांग्रेस ने इसे औपचारिक रूप से राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया।

Advertisement Box

 

यह गीत केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव रहा है। आज भी, कांग्रेस की प्रत्येक बैठक, महाधिवेशन या ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ गाया जाता है, जिससे नए पीढ़ी को राष्ट्रीय चेतना और अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता का संदेश मिलता है। समाज के कुछ संगठनों ने इस गीत से दूरी बनाई और अपने निजी महिमामंडन वाले गीतों को बढ़ावा दिया। लेकिन इतिहास और जनता की दृष्टि में, वंदे मातरम् हमेशा भारत माता के प्रति सच्चे समर्पण और देशभक्ति का प्रतीक बना रहेगा। 150 वर्ष पूरे होने पर यह याद दिलाता है कि राष्ट्र की सेवा और सम्मान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

Advertisement Box
WhatsApp