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नाबीविया से आए चीते,भारत के लिए किसी तोहफे से कम नहीं, चीते से जुड़े हुए 5 रोचक तथ्य जो आपको हिला कर रख देंगे

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नाबीविया से आए चीते,भारत के लिए किसी तोहफे से कम नहीं, चीते से जुड़े हुए 5 रोचक तथ्य जो आपको हिला कर रख देंगे

आखिर चीता क्यों जरूरी है? चीता प्रजाति क्या होती है?और भारत में यह विलुप्त क्यों हुए ?पहले यह जान लीजिए दरअसल पूरे दुनिया में “चीता” सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर है इसकी रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा होती है पूरी दुनिया में कमोबेश यही हाल है कि वहां जंगलों में चीते बचे ही नहीं है, यानी विलुप्त हो चुके हैं ,लेकिन चीते के बारे में यह 5 महत्वपूर्ण बातें आप भी जान लीजिए जानकारों का मानना है कि जेहन में जैसे ही चीते की बात आती है वैसे ही दिमाग अफ्रीका के घने जंगलों में चला जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी, कि 60 से लेकर लगभग 100 चीते अफ्रीका के पठार इलाके में पाए जाते हैं तो, वही भारत में या “एशिया महाद्वीप” में पाए जाने वाले चीतों की गर्दन और पैर छोटे होते हैं।

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एक जानकारी के मुताबिक के चीते के बच्चे व्यस्त होते-होते मर जाते हैं यही चीतों के विलुप्त होने की सबसे अहम वजह है चीता कितनी तेज दौड़ता है? यह तो सभी को मालूम है लेकिन चीता दौड़ते समय आधे काल में हवा में बना रहता है चीते की जंप 7 मीटर यानी लगभग 23 फुट होती है चीते से जुड़ी हुई चौथी और महत्वपूर्ण बात की,चीते भले ही बिल्ली के आकार के बड़े जंतु हैं ,लेकिन यह शेर की तरह दहाड़ नहीं पाते बल्कि फूफकारते है।  आम इंसान की तरह चीते को भी रात में दिखाई नहीं पड़ता, इसलिए अपना शिकार दिन की रोशनी में ,या दोपहर में करते हैं चीते से जुड़ी हुई पांचवी सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है, की मादा चीता ,हमेशा अकेले ही रहना पसंद करती है।

तो अब तक आपने जान लिया होगा,कि चीता दुनिया के लिए क्यों जरूरी है? यही वजह है कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी इस विलुप्त होती प्रजाति के लिए काफी चिंतित थे लेकिन आज भारत की सरजमी पर 24 लोगों की टीम के साथ चीते ग्वालियर एयर बेस पर जैसे ही उतरे वैसे ही देश के चप्पे-चप्पे की मीडिया,उन्हें कवर करने पहुंच गई  जाहिर सी बात है यह मौका 70 साल बाद जो आया वह भी विश्व के दिग्गज नेता और भारत के यशस्वी “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी” जी के जन्मदिन के दिन मौके पर आज 70 साल का इंतजार खत्म हुआ और 70 साल बाद देश की धरती पर 8 चीतों का पदार्पण हुआ नाबीवियां से लाए इन चीतों को ग्वालियर से चिनूक हेलीकॉप्टर के जरिए “कूनो नेशनल पार्क” ले जाया गया

जाहिर सी बात है प्रधानमंत्री ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ते,जो देश के लिए बेहद जरूरी हो प्रधानमंत्री मोदी ने बॉक्स खोल कर तीनों को “कूनो” के क्वारंटाइन बाड़े में छोड़ा प्रधानमंत्री आधा घंटे “कूनो नेशनल पार्क” में रुके चीते के साथ आए हुए दल के सदस्यों से मोदी ने बातचीत की चीतों को खास तरह के बॉक्स में लाया गया था  लकड़ी के बने इन बाड़े में हवा के लिए कई गोलाकार छेद किए गए थे चीतों के साथ नामीबिया के “वेटरनरी डॉक्टर” “एना बस्टो” भी आए हुए थे ग्वालियर में पहले तो चीतों का रूटीन चेकअप किया गया

बेड़ो को ट्राली के जरिए “ग्वालियर एयरपोर्ट” पर “चिनूक हेलीकॉप्टर “में शिफ्ट किया गया “मध्य प्रदेश” के मुख्यमंत्री “शिवराज सिंह चौहान”, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने ग्वालियर में पीएम मोदी को रिसीव किया इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री “शिवराज सिंह चौहान” ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी” जी के बर्थडे में देश में विलुप्त हो चुके, चीतों का गिफ्ट,यानी उन्हें फिर से भारत की सरजमीं पर बसाना एक ऐतिहासिक कदम है “शिवराज सिंह” ने कहा का यह तोहफा नाबीविया ने भारत को यह जो तोहफा दिया है ,यहां की सरजमी उस तोहफे को कभी नहीं भूलेगी।

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