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देश में बागवानी फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ा, सब्जी का कम

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पिछले कुछ वर्षों में फल-सब्जियों की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है। किसान धान, गेहूं गन्ना जैसी परंपरागत फसलों की जगह केला, आलू, गोभी, तरबूज, खीरा, मशरूम जैसी नकदी फसलें उगाने लगे हैं। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ें भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

किसानों की आमदनी दोगुनी करने का दावा कर रही केंद्र सरकार भी चाहती है कि किसान धान-गेहूं, गन्ना से हटकर फल सब्जियों की खेती करें। 10 फरवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा, “मैं किसानों से कहता हूं कि वो सिर्फ धान-गेहूं न उगाएं, इससे काम नहीं चलने वाला।उन्हें बाजार में मांग के हिसाब से फसलें उगाकर दुनिया को बेचना चाहिए।” प्रधानमंत्री संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने हरियाणा के चेरी टमाटर और ब्रोकली उगाने वाले किसान और बुंदेलखंड में स्ट्रॉबेरी की खेती का भी जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि ऐसे नकदी फसलों के लिए किसानों को सिंचाई सोलर से लेकर कई तरह की सब्सिडी दी जा रही है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से 8 मार्च को जारी आंकड़ों के अनुसार देश के सभी राज्यों में 2020-21 (प्रथम अनुमान) के मुताबिक 10,711 हजार हेक्टेयर में सब्जियों की खेती हो रही है, जिससे 193.61 मिलियन टन उत्पादन होने का अनुमान है जबकि 2019-20 में 10,303 हजार हेक्टेयर रकबे में 188.91 मिलियन टन उत्पादन हुआ था वहीं 2018-19 में 10,073 हजार हेक्टेयर रकबे में 183.17 मिलियन टन सब्जी का उत्पादन हुआ था।

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सब्जियों के साथ फलों की खेती का भी रकबा और उत्पादन बढ़ा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार फलों का उत्पादन 103.23 मिलियन टन होने का अनुमान है जो पिछले साल 2019-20 में 102.03 मिलियन टन था।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड देश में फल और सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने का काम करता है।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने डिप्टी डायरेक्टर शैलेंद्र सिंह गांव कनेक्शन को बताते हैं, “राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत देश में बागवानी की फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा लोग फल-सब्जियों की खेती करें इसलिए केंद्र सरकार काफी सब्सिडी देती है। योजना के तहत जो किसान खुले में बागवानी की खेती करते हैं उन्हें 40 फीसदी तक और अधिकतम 30 लाख रुपए तक मदद की जाती है। वहीं संरक्षित तरीकों (पॉली हाउस-ग्रीन हाउस) के तहत बोर्ड 50 फीसदी तक सब्सिडी है जबकि अधिकतम 56 लाख रुपए दिए जाते हैं।” सरकारी की सब्सिडी की ये सीमाएं उत्तर पूर्वी राज्यों और पहाड़ी राज्यों के और बढ़ जाती है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश में 86 फीसदी किसान छोटे और मंझोले हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे 12 करोड़ किसानों से ही धान, गेहूं, छोड़कर बाजार की मांग के अनुसार खेती की बात संसद में कर रहे थे।

फसल उपरांत होने वाले नुकसान से बचाने और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए प्याज,टमाटर और आलू के बाद 22 फसलों को ‘आपरेशन ग्रीन’ योजना में शामिल किया गया है।
किसानों को बीज से लेकर सलाह और देने वाली और मार्केट से जोड़ने वाले एग्री स्टार्टअप देहात बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और यूपी समेत कई राज्यों में सब्जियों की खेती पर काम कर रहा है।

कृषि और किसान कल्याण विभाग की तरफ से जारी अनुमान के मुताब‍िक देश में फलों के उत्‍पादन में लगातार दूसरी बार बढ़ोतरी का अनुमान है| आंकड़ों के मुताब‍िक 2019-20 में 102.08 मिलियन टन फलों का उत्‍पादन हुआ था, जो 2020-21 में बढ़कर 102.48 मिलियन टन होने का अनुमान है| वहीं 2021-22 में 102.9 मिलियन टन फलों का उत्‍पादन होने का अनुमान है।

कृष‍ि व‍िभाग की तरफ से जारी अनुमान के मुताबि‍क देश में इस वर्ष सब्‍ज‍ियों के उत्‍पादन में कमी का अनुमान है।

व‍िभाग की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 में देश के अंदर 188.28 मिलियन टन सब्‍जि‍यों का उत्‍पादन हुआ था, उसकी तुलना में 2020-21 में 200.45 मिलियन टन सब्‍ज‍ियों का उत्‍पादन हुए होने का अनुमान है| जबक‍ि 2021-22 के दौरान 199.9 मिलियन टन सब्‍ज‍ियों के उत्‍पादन होने का अनुमान है।

इस तरह चालू वर्ष में सब्‍ज‍ियों के उत्‍पादन में कमी आने का अनुमान है| ज‍िसमें प्याज का उत्पादन 2020-21 में 26.6 मिलियन टन के मुकाबले 31.1 मिलियन टन होने का अनुमान है| वहीं आलू का उत्पादन 2020-21 में 56.2 मिलियन टन की तुलना में 53.6 मिलियन टन होने की उम्मीद है।

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