31/07/2021

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कोरोना टीका बच्चों के लिए जल्द आने की उम्मीद, ट्रायल की प्रक्रिया हुई पूरी

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कोरोना टीका बच्चों के लिए जल्द आने की उम्मीद, ट्रायल की प्रक्रिया हुई पूरी

कोरोना महामारी के कारण बच्चे लंबे समय से स्कूलों से दूर हैं। नई दिल्ली। कोरोना महामारी के कारण बच्चे लंबे समय से स्कूलों से दूर हैं। उनकी जिंदगी घर की चारदीवारी व मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गई है। तीसरी लहर की आशंका भी बनी हुई है। अच्छी बात यह है कि बच्चों पर कोवैक्सीन के ट्रायल के लिए दूसरी डोज देने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इससे बच्चों के लिए टीका जल्द आने की उम्मीद बढ़ गई है। बच्चों पर कोवैक्सीन के ट्रायल के लिए दूसरी डोज देने का काम पूरा ट्रायल के दौरान पहले किशोरों को टीका देकर सुरक्षा का आकलन किया गया था। इसके बाद छह से 12 साल की आयु के बच्चों और अंत में दो से छह साल के बच्चों को टीका दिया गया। गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दो से छह साल की उम्र के बच्चों को दूसरी डोज दी गई। इसके बाद ट्रायल का काम पूरा हो गया है। ट्रायल के दौरान बच्चों को टीके का प्रभाव भी देखा जा रहा है। अगस्त के अंत या सितंबर के मध्य में आएगी ट्रायल की अंतरिम रिपोर्ट अगस्त के अंत तक या सितंबर के मध्य तक ट्रायल की अंतरिम रिपोर्ट आ सकती है। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट आने में वक्त लगेगा, लेकिन अंतरिम रिपोर्ट से पता चल सकेगा कि टीका बच्चों के लिए कितना सुरक्षित है। इसके बाद उनके लिए टीके का इमरजेंसी इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है। देश के छह अस्पतालों में 525 बच्चों पर चल रहा ट्रायल देश के छह अस्पतालों में 525 बच्चों पर यह ट्रायल चल रहा है। इसके तहत बच्चों को तीन उम्र वर्ग (12 से 18, छह से 12 व दो से छह) में बांटकर ट्रायल किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया मई के अंतिम सप्ताह में शुरू हुई थी। एम्स में कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डाॅ. संजय राय के नेतृत्व में नौ जून को ट्रायल शुरू हुआ था। एम्स को उम्मीद- सुरक्षा के पैमाने पर बच्चों के लिए खरा उतरेगा टीका डाॅक्टर कहते हैं कि ट्रायल के दौरान एक आयु वर्ग के बच्चों पर टीके की सुरक्षा का आकलन करने के बाद ही दूसरी आयु वर्ग के बच्चों को टीका दिया गया है। इसलिए उम्मीद है कि सुरक्षा के पैमाने पर बच्चों के लिए भी टीका खरा उतरेगा। टीका लगने के 28 दिन, 56 दिन, 118 दिन व 208 दिन पर बच्चों के ब्लड सैंपल लेकर एंटीबाडी जांच भी की जाएगी। इससे पता चल सकेगा कि टीके से बच्चों में इम्यूनिटी किस तरह से विकसित होती है।

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