
अमेरिकी सेना ने ईरान में एक बेहद खतरनाक और साहसिक ऑपरेशन के तहत अपने दो F-15 पायलटों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की। यह घटना तब हुई जब शुक्रवार को ईरान ने एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया। विमान में दो लोग सवार थे – मेन पायलट और एयरमैन यानी वेपन सिस्टम ऑफिसर।
मेन पायलट को कुछ घंटों में ही बचा लिया गया था, लेकिन एयरमैन पैराशूट से उतरने के दौरान घायल हो गया। इसके बावजूद वह खुद को कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में छिपा पाया। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (Survival, Evasion, Resistance, Escape) का इस्तेमाल कर एक दिन से अधिक समय तक दुश्मन की पकड़ से बचा रहा।
इस बीच CIA ने एक चालाकी भरी रणनीति अपनाई। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना एयरमैन को पहले ही ढूंढ चुकी है, जिससे ईरान की खोज भटक गई। इसके बाद CIA ने अपनी तकनीक से एयरमैन की सही लोकेशन का पता लगाया और जानकारी पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस तक पहुंचाई।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। शनिवार को अमेरिकी स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के तहत ऑपरेशन शुरू किया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को ऑपरेशन इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल एयरमैन के पास केवल एक पिस्तौल थी। गोलीबारी के बीच अमेरिकी टीम ने एयरमैन को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की और सभी सैनिक ईरान से बाहर चले गए।
पूर्व अमेरिकी मेजर जनरल मार्क मैक्कार्ली ने बताया कि यह ऑपरेशन बेहद खतरनाक था। एयरमैन की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन से मिली, जो लगातार कमांड सेंटर को सिग्नल भेजता रहा। अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन ने उस दौरान ईरानी फोर्स पर हमले किए, जो एयरमैन को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान दो अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंस गए। अमेरिका ने तुरंत तीन नए विमान भेजकर एयरमैन और सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला और फंसे हुए विमानों को उड़ा दिया।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को अमेरिकी सैन्य इतिहास का सबसे साहसिक सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया। उन्होंने बताया कि यह पहला मौका है जब दुश्मन के इलाके में अलग-अलग ऑपरेशन में दो अमेरिकी पायलटों को सुरक्षित निकाला गया।








