
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। वेस्ट एशिया में यह तनाव 28 मार्च को उस समय चरम पर पहुँचा जब इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमले किए। तब से ही यह संघर्ष लगभग दो सप्ताह से अधिक समय से जारी है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और गहराता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति तथा तेल की कीमतों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि वैश्विक तेल संकट फिर से उत्पन्न हो सकता है- जैसे कि इतिहास में 1973 के तेल संकट और उसके बाद कई बार देखा गया।
भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है। क्योंकि भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक तेल उपलब्धता में किसी भी अप्रत्याशित रुकावट का असर रिफाइनिंग, परिवहन, घरेलू ईंधन आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों पर अनिवार्य रूप से पड़ेगा।
भारत सरकार का आश्वासन: आपूर्ति सुरक्षित, घबराहट बेकार
इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की केंद्रीय सरकार ने देश में फिलहाल तेल और गैस की कोई कमी नहीं होने का स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में गुरुवार को बयान देते हुए कहा कि देश में तेल और गैस की पर्याप्त उपलब्धता मौजूद है और आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि हाल में अफवाहों के कारण लोगों में अनावश्यक घबराहट फैल गई, जिससे गैस सिलेंडरों की मांग में अचानक असामान्य वृद्धि देखी गई। कुछ क्षेत्रों में लोग गैस सिलेंडरों की स्टॉकिंग करने लगे जिससे बाजार में क्षणिक दबाव उत्पन्न हो गया। लेकिन मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह दबाव आपूर्ति की कमी की वजह से नहीं, बल्कि अफवाहें और जनता की चिंताएँ हैं।
उनका कहना था कि जनता को केवल भरोसेमंद और आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करना चाहिए और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए। इससे न केवल असहमति पैदा होती है बल्कि वास्तविक आपूर्ति चेन पर अस्थायी दबाव भी बनता है, जो आवश्यक नहीं है।
एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति फिर से चालू
पीएम द्वारा संसद में यह भी जानकारी दी गई कि व्यवसायिक एलपीजी सिलिंडरों (कॉमर्शियल LPG) की आपूर्ति भी आज से सामान्य रूप से फिर से शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं को 45 दिनों के भीतर दूसरी बुकिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि उन तक गैस सिलिंडरों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
यह निर्णय इस बात को सुनिश्चित करता है कि आपूर्ति चेन में किसी भी प्रकार की व्यवधान या पिछड़ापन न आए और घरेलू उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
रिफाइनरियों का उत्पादन-पूरा योगदान
प्रधान मंत्री के आश्वासन के अनुरूप भारत की प्रमुख रिफाइनरियाँ भी वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता (100%) पर उत्पादन कर रही हैं। इसका अर्थ है कि कच्चे तेल से पेट्रोल, डीजल तथा अन्य उत्पादों का उत्पादन सामान्य से कहीं अधिक स्तर पर है और कोई उत्पादन गिरावट नहीं आई है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की स्थानीय मांग पहले से ही मजबूत है और सरकार तथा तेल कंपनियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि कहीं भी मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन न हो।
Indian Oil Corporation का विश्वास दिलाना
देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनी Indian Oil Corporation ने भी बयान जारी करते हुए कहा है कि वह देशभर में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्यरत है। कंपनी ने कहा कि उसके सभी फ्यूल स्टेशन सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं और पेट्रोल तथा डीजल की पर्याप्त आपूर्ति जारी है।
साथ ही कंपनी ने जनता से आग्रह किया कि वे केवल विश्वसनीय तथा आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्यूल स्टेशनों पर संतुलित स्टॉक बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और हस्तक्षेप
वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में किसी भी अप्रत्याशित रुकावट का असर सभी देशों पर पड़ता है, लेकिन इसके प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम भी उठाए जा रहे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) ने अपने Strategic Petroleum Reserve (SPR) से 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने की घोषणा की है। यह कदम तेल की वैश्विक उपलब्धता को बनाए रखने और कीमतों पर होने वाले अप्रत्याशित उछाल को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
साथ ही International Energy Agency (IEA) ने भी एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अपने सदस्य देशों के 400 मिलियन बैरल तेल आपातकालीन भंडार (Emergency Reserves) से बाजार में तेल जारी करने का ऐलान किया है। यह कदम 1973 के बाद पहली बार नहीं बल्कि इसके बाद छठी बार है जब IEA ने वैश्विक तेल संकट या संभावित आपूर्ति रुकावटों से निपटने के लिए इस तरह के सामूहिक उपायों को लागू किया है।







