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पश्चिम एशिया युद्ध का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों की ₹22 लाख करोड़ संपत्ति घटी

शेयर बाजार में भारी गिरावट
शेयर बाजार में भारी गिरावट
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 9 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और तेल की कीमतों में उछाल के कारण बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

बाजार का प्रदर्शन

सोमवार को बाजार बंद होने तक BSE Sensex 1,353 अंक यानी लगभग 1.71 प्रतिशत गिरकर 77,566 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 422 अंक यानी लगभग 1.73 प्रतिशत गिरकर 24,028 पर आ गया।

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बैंकिंग, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG जैसे प्रमुख सेक्टरों में सबसे अधिक बिकवाली देखी गई। इससे पहले 6 मार्च को भी बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 1,097 अंक और निफ्टी 315 अंक नीचे बंद हुए थे।

निवेशकों की संपत्ति में भारी नुकसान

युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी के आसपास Bombay Stock Exchange पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹4.63 लाख करोड़ था, जो अब घटकर लगभग ₹4.41 लाख करोड़ रह गया है। इसका मतलब है कि कुछ ही दिनों में निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹22 लाख करोड़ की गिरावट आ चुकी है।

तेल आपूर्ति पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरा बढ़ गया है। खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। पिछले दस दिनों में तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल देखा गया। अंतरराष्ट्रीय मानक Brent Crude Oil और West Texas Intermediate की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गईं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तनाव जारी रहा तो कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जो 5 से 6 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं।

वैश्विक बाजारों में भी गिरावट

पश्चिम एशिया के तनाव का असर वैश्विक बाजारों में भी दिखाई दिया।

  • दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 5.96 प्रतिशत गिरा।

  • जापान का Nikkei 225 5.20 प्रतिशत नीचे आया।

  • हांगकांग का Hang Seng Index और चीन का Shanghai Composite Index भी गिरावट के साथ बंद हुए।

अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखी गई, जहां Dow Jones Industrial Average, Nasdaq Composite और S&P 500 में गिरावट दर्ज की गई।

रुपया कमजोर, सोना-चांदी मजबूत

तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर करीब 92.33 के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

दूसरी ओर, निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिससे सोना और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज हुई। 24 कैरेट सोना लगभग 800 रुपये बढ़कर करीब 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जबकि चांदी लगभग 2,000 रुपये बढ़कर 2.63 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई।

आगे क्या?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई पर पड़ेगा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है। हालांकि, यदि युद्ध सीमित रहा और जल्द समाप्त हो गया, तो बाजार में धीरे-धीरे सुधार भी संभव है।

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