Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

क्या बिहार की राजनीति में एक युग का अंत?

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों का इतिहास लिखना हो तो उसके केंद्र में एक नाम बार-बार सामने आता है- नीतीश कुमार कभी सुशासन बाबू के रूप में पहचान बनाने वाले इस नेता ने राज्य की राजनीति को नई दिशा देने का दावा किया था। लेकिन अब जो घटनाक्रम सामने आ रहा है, उससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार की राजनीति में एक युग का शांत अंत हो रहा है?

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रीअमीत शाह ने सार्वजनिक रूप से नीतीश कुमार के कार्यकाल को शानदार बताया। पहली नजर में यह तारीफ लगती है, लेकिन राजनीतिक संकेतों को समझने वाले इसे एक संभावित विदाई संदेश के रूप में भी देख रहे हैं। चर्चा यह है कि नीतीश कुमार को राज्य की सक्रिय राजनीति से हटाकर राज्यसभा के रास्ते राष्ट्रीय राजनीति में भेजा जा सकता है।

Advertisement Box

यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। बिहार की जनता ने बार-बार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में जनादेश दिया। उनके नेतृत्व में कई चुनाव लड़े गए और गठबंधनों की राजनीति के बावजूद उनका चेहरा ही चुनावी अभियान का केंद्र रहा। ऐसे में यदि उन्हें चुपचाप राज्यसभा भेजा जाता है, तो क्या यह जनता के उस जनादेश की भावना के अनुरूप होगा?

सवाल इसलिए भी उठता है क्योंकि बीजेपी बिहार में लंबे समय तक अपने दम पर सत्ता हासिल नहीं कर सकी। राज्य में उसकी राजनीतिक ताकत अक्सर गठबंधन की राजनीति पर निर्भर रही है। नीतीश कुमार के साथ गठबंधन ने उसे स्थिरता और स्वीकार्यता दी। ऐसे में अगर वही नेता अब धीरे-धीरे हाशिये पर चले जाएं, तो इसे केवल राजनीतिक पुनर्संतुलन कहना शायद पर्याप्त नहीं होगा।

राजनीति में यह भी चर्चा रही कि पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार की सक्रियता कम दिख रही थी। उनके स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता को लेकर भी सवाल उठे। लेकिन इसके बावजूद चुनावों में उनका चेहरा ही गठबंधन की पहचान बना रहा। यही कारण है कि यदि अब उन्हें राज्यसभा के माध्यम से बिहार की राजनीति से दूर किया जाता है, तो इसे ‘बैकडोर राजनीति’ के रूप में भी देखा जा सकता है।

हालांकि राजनीति केवल भावनाओं से नहीं चलती। सत्ता में साझेदार दल अक्सर अपने दीर्घकालिक हितों के अनुसार रणनीति बनाते हैं। हो सकता है कि यह बदलाव भविष्य की राजनीति के लिए रास्ता तैयार करने की कोशिश हो। लेकिन यह भी सच है कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक राजनीतिक धुरी रहे हैं।

आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उनके समर्थक इस बदलाव को सहज रूप से स्वीकार करेंगे। क्या यह परिवर्तन स्वाभाविक राजनीतिक संक्रमण साबित होगा या फिर इसे बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जाएगा? इन सवालों का जवाब आने वाले महीनों में ही मिलेगा। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है।

आज का राशिफल

वोट करें

आमिर की अगली फिल्म 'सितारे जमीन पर' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ। क्या यह फिल्म आमिर को बॉक्स ऑफिस पर सफलता दिला पाएगी?

Advertisement Box
WhatsApp