
ईरान और इज़राइल के बीच शुरू हुई सैन्य टकराव की घटनाओं ने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इस जंग का असर सीधे तौर पर भारत के आर्थिक हितों पर दिखाई दे सकता है, खासकर तेल, व्यापार, शेयर बाजार और कीमती धातुओं की कीमतों पर। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध और बढ़ता है, तो होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का खतरा गंभीर रूप ले सकता है। यह मार्ग भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि देश को हर महीने मिलने वाली तेल सप्लाई का लगभग 50 प्रतिशत इसी रास्ते से आता है।
होर्मुज स्ट्रेट: भारत के लिए क्यों अहम
होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। भारत अपनी कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की जरूरत का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से मंगवाता है, जिसका अधिकांश भाग इसी स्ट्रेट से होकर गुजरता है। यदि इस मार्ग पर कोई बाधा आती है-जैसे ईरान द्वारा ब्लॉक या इज़राइल के हमले-तो सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इसका मतलब यह है कि भारत को हर महीने मिलने वाला तेल आधा कम हो सकता है, जिससे घरेलू बाजार में तेल की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई की दर बढ़ेगी।
नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी संकट
सिर्फ तेल ही नहीं, भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी इस युद्ध का असर पड़ सकता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही जाता है। इसमें बासमती चावल, मसाले, चाय, ताजे फल, सब्जियां और इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं। अगर यह मार्ग बंद होता है या माल ढुलाई महंगी हो जाती है, तो भारतीय एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ जाएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा। इससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा है।
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और शेयर बाजार पर असर
क्रूड ऑयल की कीमतें भारत के शेयर बाजार के लिए हमेशा संवेदनशील रही हैं। यदि ईरान-इज़राइल तनाव बढ़ता है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80–85 डॉलर प्रति बैरल के पार चली जाती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिल सकती है। शुक्रवार को ही ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.87 प्रतिशत बढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी।
तेल की बढ़ती कीमतों का असर पेंट, टायर, एविएशन और लॉजिस्टिक जैसे सेक्टर पर भी पड़ेगा। इन सेक्टरों में मार्जिन पर सीधा दबाव आएगा। साथ ही, विदेशी निवेशक पहले से ही भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। ऐसे में जियो-पॉलिटिकल टेंशन और तेज होने पर भारतीय शेयर बाजार में गिरावट और भी गहरा सकती है।
सोना और चांदी में उछाल की संभावना
अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। ईरान-इज़राइल युद्ध के चलते सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेशों की मांग बढ़ सकती है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतें नई ऊंचाई को छू सकती हैं। यदि अमेरिका सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल होता है, तो डॉलर के मुकाबले सोने की मांग और बढ़ सकती है।
चांदी की इंडस्ट्रियल और निवेश संबंधी मांग में भी तेजी आने की संभावना है, जिससे यह निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न का साधन बन सकता है। शुक्रवार को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,075 रुपए बढ़कर ₹1.59 लाख पर पहुंच गई, जबकि चांदी की कीमत 6,033 रुपए बढ़कर ₹2.66 लाख प्रति किलो हो गई। इससे पहले गुरुवार को सोना 1.58 लाख रुपए और चांदी 2.61 लाख रुपए प्रति किलो थी।
आर्थिक और सुरक्षा जोखिम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध बढ़ता है और होर्मुज स्ट्रेट लंबी अवधि के लिए बंद होता है, तो न सिर्फ तेल और व्यापार प्रभावित होंगे, बल्कि भारत की आर्थिक स्थिरता पर भी दबाव पड़ेगा। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ेगी, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ेंगी। साथ ही, निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर शिफ्ट होंगे, जिससे शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी।
भारत के लिए यह समय न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है। सरकार और उद्योग जगत को आपूर्ति चेन के वैकल्पिक मार्ग और जोखिम प्रबंधन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर तेल, व्यापार और निवेश से जुड़ी स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए भारतीय निवेशकों और उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और आर्थिक फैसलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।







