
मेक फॉर द वर्ल्डः मोजाम्बिक पहुंचा भारत का 10वां स्वदेशी लोकोमोटिव
मापुतो । भारत ने एक बार फिर ग्लोबल स्टेज पर लोकोमोटिव (ट्रेन का इंजन) मैन्युफैक्चरिंग में देश की टेक्नोलॉजिकल ताकत और इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस को दिखाया है। भारत ने अपने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ विजन के मुताबिक ग्लोबल साउथ के देश मोजाम्बिक को 3,300 हॉर्सपावर वाले एसी-एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की दसवीं और आखिरी यूनिट भेज दी है।
मोजाम्बिक स्थित भारतीय उच्चायोग ने 23 फरवरी को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट को साझा करते हुए यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार ये इंजन बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू), वाराणसी द्वारा तैयार किए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है यह माइलस्टोन बीएलडब्ल्यू की बढ़ती ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस को दिखाता है और इंडियन रेलवे की एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पार्टनर के तौर पर इंटरनेशनल रेप्युटेशन को मजबूत करता है। राइट्स लिमिटेड के जरिए किए गए एक एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट के तहत तय टाइमफ्रेम के अंदर लोकोमोटिव को विभिन्न चरणों में बनाया गया था। बीएलडब्ल्यू में डिजाइन और मैन्युफैक्चर किए गए, ये स्टेट-ऑफ-द-आर्ट 3,300 एचपी केप गेज (1,067 एमएम) लोकोमोटिव 100 किमी प्रति घंटा तक की स्पीड से ऑपरेट करने में समर्थ हैं।
ये इंजन इंटरनेशनल स्टैंडर्ड को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जिनमें एडवांस्ड एसी-एसी ट्रैक्शन टेक्नोलॉजी, एक मॉडर्न और एर्गोनोमिक कैब डिजाइन और रेफ्रिजरेटर, हॉट प्लेट तथा मोबाइल होल्डर जैसी बेहतर ड्राइवर-कम्फर्ट सुविधाएं हैं। बीएलडब्ल्यू ने अब तक तंजानिया, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, सूडान, अंगोला, म्यांमार, सेनेगल, माली और मोजाम्बिक समेत 11 देशों को 182 लोकोमोटिव एक्सपोर्ट किए हैं, जिसने इन देशों के ट्रेन सिस्टम के डेवलपमेंट और मॉडर्नाइजेशन में काफी मदद की है।
यह कामयाबी साफ तौर पर भारत की बढ़ती टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता, इंडस्ट्रियल काबिलियत और ग्लोबल रेलवे इक्विपमेंट मार्केट में उसके लगातार बढ़ते असर को दिखाती है। यह छोटे-छोटे कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ विजन को आगे बढ़ाने और देश को एक्सपोर्ट हब बनाने में दिशा में काफी उपयोगी साबित होंगे।









