
लखनऊ मेट्रो में सुरक्षा और प्रबंधन की गंभीर खामियां सामने आई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट नंबर 12 ऑफ 2025 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में रखी गई है, जिसमें लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) की कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट मुख्य रूप से 2017 से 2022 तक की अवधि पर आधारित है, लेकिन इसमें संचालन और रखरखाव से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा
सबसे गंभीर बात यह है कि नार्थ-साउथ कॉरिडोर पर मेट्रो चार साल से अधिक समय तक बिना नवीनीकृत इंटरिम स्पीड सर्टिफिकेट (ISC) के चल रही है। वर्ष 2022 में ही RDSO से जांच कराकर इस प्रमाणपत्र का नवीनीकरण होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह प्रमाणपत्र रोलिंग स्टॉक के पहियों में घिसावट और एडजस्टमेंट की जांच के लिए जरूरी है। CAG ने इसे यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया है।
इसके अलावा, IIT कानपुर की जांच में रेल लाइनों की कठोरता (हार्डनेस) मानकों से कम पाई गई:
- डिपो क्षेत्र में न्यूनतम 260 BHN होना चाहिए, लेकिन 229.07 से 242.52 BHN मिला।
- मुख्य लाइन पर 340-390 BHN की जरूरत, लेकिन 291.78 से 308.79 BHN दर्ज हुई।
मानकों से कम कठोरता वाली रेलों के इस्तेमाल से पटरियों और पहियों में तेजी से क्षरण हो सकता है, जिससे रखरखाव लागत बढ़ेगी और सुरक्षा जोखिम बढ़ेगा।
साइबर सुरक्षा में लापरवाही
मेट्रो में संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली (CBTCS) का उपयोग हो रहा है, लेकिन इसकी इंटरफेयरेंस और जैमिंग से सुरक्षा की जांच केवल इंटेलिजेंस ब्यूरो से हो रही है। मानकों के अनुसार प्रमाणित साइबर सुरक्षा एजेंसी से VAPT (Vulnerability Assessment and Penetration Testing) कराना जरूरी था। इस कमी से पूरी मेट्रो प्रणाली हैकिंग या मालफंक्शन का शिकार हो सकती है।
बिना टेंडर के अनुबंध और अतिरिक्त भुगतान
- सुरक्षा फर्म G4S Secure Solutions को जून 2016 में बिना टेंडर के तीन साल के लिए अनुबंध दिया गया। हर महीने 32.72 लाख रुपये दिए गए, जो मार्च 2023 तक चला। CVC गाइडलाइंस और GFR के नियमों का उल्लंघन।
- कई कार्यों में अनुमानित लागत से भारी भिन्नता आई, लेकिन MD ने खुद स्वीकृति दे दी, जबकि 15% से अधिक भिन्नता पर उच्च स्तर की मंजूरी जरूरी थी। उदाहरण:
| कार्य का नाम | अनुमानित लागत (करोड़) | अनुबंधित लागत (करोड़) | भिन्नता (करोड़) | वास्तविक लागत (करोड़) |
|---|---|---|---|---|
| LKCC-03 | 145.60 | 130.51 | 44.97 | 175.48 |
| LKCC-04 | 95.85 | 85.55 | 25.86 | 111.41 |
| LKCC-09 | 95.25 | 80.94 | 26.04 | 106.98 |
ध्वनि स्तर मानकों से अधिक
IIT कानपुर ने रैपिड ट्रांजिट संस्थान, वॉशिंगटन डीसी के मानकों (65-75 dB) के आधार पर जांच की। 40 kmph गति पर परीक्षण में ध्वनि स्तर 83.4 dB तक पहुंचा, जो यात्री आराम के लिए खतरनाक है। कुछ प्रमुख नतीजे:
- मुंशीपुलिया (एलिवेटेड, स्थिर, खुले दरवाजे, भीतरी): 65 dB मानक, लेकिन 76.1-74.9 dB।
- मुंशीपुलिया से KD सिंह स्टेडियम (गतिशील, भीतरी): 75 dB मानक, लेकिन 83.4 dB तक।
- हजरतगंज (अंडरग्राउंड, स्थिर, बाहरी): 67 dB मानक, लेकिन 81.3-78 dB।
यात्री संख्या और राजस्व लक्ष्य से बहुत कम
डीपीआर में अनुमानित दैनिक यात्रियों की संख्या मार्च 2019 से हासिल नहीं हुई। 88% तक कमी दर्ज की गई, जिससे राजस्व पर बुरा असर पड़ा। मेट्रो घाटे में चल रही है और अपेक्षित वित्तीय स्थिरता नहीं आई।
CAG ने इन लापरवाहियों पर सख्त टिप्पणी की है और सुधार की सिफारिश की है। यह रिपोर्ट लखनऊ मेट्रो के प्रबंधन और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सार्वजनिक धन के उपयोग पर बड़ा असर पड़ सकता है।








