
रमज़ान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए रोज़ा रखने का समय है। इस दौरान लंबे समय तक भूखे रहने के कारण शरीर में एनर्जी लेवल और वेल-बीइंग पर असर पड़ सकता है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सहरी और इफ़्तार में सही खानपान और हाइड्रेशन बनाए रखना पूरे महीने हेल्थ और प्रोडक्टिविटी के लिए बेहद जरूरी है।
डाइटीशियन नाज़िमा कुरैशी के अनुसार, रोज़े के दौरान बैलेंस बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि सहरी में साबुत अनाज, प्रोटीन और हेल्दी फैट वाला खाना खाया जाए। इससे एनर्जी लेवल दिनभर स्थिर रहता है। वहीं, सफेद ब्रेड या मीठे अनाज से बचना चाहिए क्योंकि ये ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा सकते हैं और जल्दी भूख लगने का कारण बनते हैं।
इफ़्तार के समय, बहुत भूख लगने पर तली हुई चीज़ों से सीधे शुरुआत करने के बजाय पहले खजूर, पानी और हल्के फल खाने की सलाह दी जाती है। यह शरीर को धीरे-धीरे खाना पचाने में मदद करता है और अत्यधिक कैलोरी लेने से बचाता है। कुरैशी बताती हैं कि सलाद, दही या स्मूदी जैसी हल्की चीज़ें इफ़्तार में सही चुनाव साबित होती हैं।
कॉफी और प्रोसेस्ड फूड पर भी ध्यान देना जरूरी है। सहरी में कॉफी ली जा सकती है, लेकिन शाम में इससे बचना चाहिए क्योंकि यह नींद पर असर डाल सकती है। प्रोसेस्ड फूड में कैलोरी ज्यादा लेकिन न्यूट्रिएंट्स कम होते हैं, जिससे थकान महसूस हो सकती है।
रमज़ान में चक्कर आना, थकान और कमज़ोरी जैसी समस्याएं अक्सर हाइड्रेशन की कमी और खाने की आदतों के कारण होती हैं। इसलिए रोज़ा खोलने से पहले और बाद में पर्याप्त पानी पीना चाहिए। रात के समय भारी और मीठा खाना लेने से बचें; इसके बजाय हल्के स्नैक्स जैसे फल, दही या स्मूदी लेना बेहतर होता है।
सही खानपान और हाइड्रेशन के साथ रमज़ान में शरीर और मन दोनों स्वस्थ रह सकते हैं। यह न केवल हेल्थ बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि पूरे महीने की प्रोडक्टिविटी और एनर्जी लेवल को भी बेहतर बनाता है। इस पवित्र महीने में बैलेंस्ड डाइट अपनाकर, मुसलमान न केवल धार्मिक कर्तव्यों को निभा सकते हैं, बल्कि अपने शरीर और दिमाग की ताकत भी बनाए रख सकते हैं।








