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ब्रिटेन किंग चार्ल्स के छोटे भाई एंड्रयूज माउंटबेटन गिरफ्तार

एंड्रयूज माउंटबेटन गिरफ्तार
एंड्रयूज माउंटबेटन गिरफ्तार
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Written by
Rishabh Rai

ब्रिटेन के शाही परिवार एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रिंस एंड्रयू , जो किंग चार्ल्स के छोटे भाई हैं, को पद के कथित दुरुपयोग के आरोपों के संदर्भ में पूछताछ और कानूनी जांच का सामना करना पड़ रहा है। कुछ खबरों में उनके गिरफ्तार किए जाने का दावा भी किया गया है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।

BBC की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि शिकायत मिलने के बाद थेम्स वैली पुलिस ने कानूनी सलाहकारों से परामर्श शुरू किया है। आरोप यह है कि व्यापार दूत (ट्रेड एंबेसडर) के रूप में कार्य करते समय गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान में नियमों का उल्लंघन हुआ।

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बताया जाता है कि पिछले सप्ताह एक राजशाही विरोधी कार्यकर्ता ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में दावा किया गया कि एंड्रयू ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और संवेदनशील दस्तावेज साझा किए। वहीं The Times की एक रिपोर्ट में पूर्व बोर्ड ऑफ ट्रेड अध्यक्ष के हवाले से भी गंभीर सवाल उठाए गए।

इस पूरे घटनाक्रम से पहले ही एंड्रयू अपने शाही विशेषाधिकारों से काफी हद तक वंचित हो चुके थे।बकिंघम पैलेस ने बीते वर्षों में जारी बयान में स्पष्ट किया था कि वे अब आधिकारिक तौर पर केवल एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर के नाम से जाने जाएंगे और सक्रिय शाही कर्तव्यों से दूर रहेंगे।

इन आरोपों का संबंध अमेरिकी वित्तीय अपराधी Jeffrey Epstein से जुड़े दस्तावेजों से भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी फाइल या दस्तावेज में नाम आने मात्र से दोष सिद्ध नहीं हो जाता। एंड्रयू लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि औपचारिक आपराधिक जांच शुरू होती है, तो यह मामला ब्रिटिश शाही इतिहास के सबसे संवेदनशील प्रकरणों में गिना जाएगा। फिलहाल, स्थिति आरोपों और प्रारंभिक जांच के दायरे में है, और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

एपस्टीन फाइल्स और वैश्विक हस्तियों पर उठते सवाल

एपस्टीन प्रकरण केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़ी तथाकथित एपस्टीन फाइल्स में कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम सामने आने का दावा किया गया है। इन दस्तावेजों में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प , उद्योगपति मस्क और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स जैसे नामों का उल्लेख बताया जाता है।

इसके अलावा मनोरंजन जगत से दिवंगत पॉप स्टार माइकल जैक्सन , रोलिंग स्टोन्स के गायक मिक जैगर और अभिनेता केविन स्पेसी का नाम भी चर्चाओं में रहा है। राजनीति और अकादमिक क्षेत्र से एहुद बराक, अर्थशास्त्री लॉरेंस एच. समर्स, पूर्व राजनयिक विलियम ब्लेन रिचर्डसन, कारोबारी लेस वेक्सनर , दार्शनिक नोआम चोम्स्की और वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग जैसे नामों का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि कानूनी विशेषज्ञ बार-बार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि किसी दस्तावेज, संपर्क सूची या यात्रा रिकॉर्ड में नाम आने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति ने कोई अपराध किया है। कई मामलों में लोग सामाजिक, व्यावसायिक या शैक्षणिक कार्यक्रमों के कारण संपर्क में आए हो सकते हैं।

एपस्टीन मामले ने वैश्विक स्तर पर शक्ति, प्रभाव और जवाबदेही को लेकर बहस को तेज किया है। इससे यह सवाल भी उठा कि क्या प्रभावशाली व्यक्तियों की जांच सामान्य नागरिकों की तरह ही निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से हो पाती है।

जनता और मीडिया की बढ़ती निगरानी के बीच यह आवश्यक है कि तथ्यों और आरोपों में अंतर किया जाए। किसी भी लोकतांत्रिक समाज में न्यायिक प्रक्रिया, सबूत और निष्पक्ष सुनवाई सर्वोपरि होते हैं। एपस्टीन फाइल्स से जुड़े नामों पर चर्चा जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय अदालतों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों पर ही निर्भर करेगा

 

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