
ग्रामीण युवाओं के भविष्य की दिशा तय करने लखनऊ में जुटे सात राज्यों के कौशल विशेषज्ञ
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की उच्च स्तरीय कार्यशाला में विजन 2047 के अनुरूप स्किल फ्रेमवर्क पर मंथन
कौशल विकास में बड़ा निवेश, बजट 10 गुना बढ़ा, ग्रीन जॉब्स और हेल्थकेयर बने प्राथमिकता क्षेत्र
DDU-GKY 2.0 और RSETI 2.0 के जरिए ग्रामीण भारत में स्थायी स्किल इकोसिस्टम का संकल्प
रोजगार से आगे बढ़कर उद्यमिता आधारित कौशल मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं कदम – प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम
लखनऊ, ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) द्वारा होटल सेंट्रम लखनऊ में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला-सह-प्री-ईसी (Pre-EC) बैठक का आयोजन किया जा रहा है। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश समेत लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, बिहार और झारखंड के अधिकारी भाग ले रहे हैं।

प्रथम दिवस सोमवार को कार्यशाला का उद्घाटन प्रमुख सचिव
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता डॉ. हरिओम द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह, MoRD के निदेशक (कौशल) राज प्रिय सिंह और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में ‘विजन 2047’ के अनुरूप कौशल ढांचे को मजबूत करने और प्रशिक्षण के बाद युवाओं की दीर्घकालिक हैंडहोल्डिंग पर विशेष जोर दिया गया।

प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास के पारंपरिक प्लेसमेंट आधारित मॉडल से आगे बढ़ते हुए अब उद्यमिता-आधारित प्रशिक्षण की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने DDU-GKY 2.0 में स्वरोजगार घटक जोड़ने के UPSDM प्रस्ताव को मंजूरी दी है। साथ ही ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना’ के अंतर्गत MSME ऋण सीमा को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने जैसे निर्णय युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे। उन्होंने न्यूनतम 12,000 रुपये वेतन और 75 प्रतिशत इन-स्टेट प्लेसमेंट जैसी नीतियों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अधिकारियों ने बताया कि कौशल विकास बजट को 150 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये किया गया है। भविष्य में ‘ग्रीन जॉब्स’ और ‘हेल्थकेयर’ जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण, माइग्रेशन फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना तथा उद्योगों के साथ सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मिशन अब डेटा आधारित ‘स्किल गैप असेसमेंट’ के आधार पर जिला स्तरीय योजनाएं तैयार कर रहा है, जिससे स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सके।
कार्यशाला के पहले दिन DDU-GKY 2.0 और RSETI 2.0 के तहत वार्षिक कार्य योजना (AAP) 2026 पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि RSETI ने 631 केंद्रों के माध्यम से अब तक 43 लाख से अधिक उम्मीदवारों को स्वरोजगार से जोड़ा है। आगामी सुधारों में SC/ST, महिलाओं और बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता देने के साथ समावेशी विकास पर बल दिया जाएगा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद लद्दाख ने DDU-GKY के 70-80 प्रतिशत लक्ष्यों की पूर्ति कर उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यशाला के प्रथम दिवस के अंत में सात राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, उत्तराखंड, पंजाब और झारखंड ने ग्रामीण भारत में सशक्त और स्थायी ‘स्किल इकोसिस्टम’ विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया।









