
लोकसभा स्पीकर को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में बखूबी सजा-संवर कर रखी गई है। इसको समझने के लिए हमें संविधान के अनुच्छेद 94 की ओर देखना होगा, जो साफ-साफ बताता है कि स्पीकर को केवल एक विशेष प्रस्ताव द्वारा ही हटाया जा सकता है। लेकिन यह कोई आसान काम नहीं है, इसके लिए एक कठोर और खास प्रक्रिया का पालन करना होता है।
प्रस्ताव की शुरुआत
सबसे पहले तो लोकसभा में एक प्रस्ताव लाना होता है, जिसे कम से कम 14 दिन पहले नोटिस दिया जाना जरूरी है। यह नोटिस लोकसभा के सभी सदस्यां को दिया जाता है, ताकि हर किसी को इस प्रस्ताव की जानकारी हो। अगर लोकसभा के कम से कम 50 सदस्य इसका समर्थन करते हैं, तभी यह प्रस्ताव विचार के लिए स्वीकार किया जाएगा। बिना इस समर्थन के, प्रस्ताव को सदन में पेश करना नामुमकिन हो जाता है।
बहुमत की शर्त:
अब, जब यह प्रस्ताव पेश किया जाता है तो साधारण बहुमत से काम नहीं चलता। इस प्रस्ताव को लोकसभा के प्रभावी बहुमत से पारित करना जरूरी होता है। प्रभावी बहुमत का मतलब है—रिक्त सीटों को छोड़कर, जो सदस्य उस समय सदन में मौजूद हैं, उनके बीच में आधे से ज्यादा सदस्य इसके पक्ष में मतदान करें।
स्पीकर की भूमिका:
जब यह प्रस्ताव लोकसभा में चर्चा के लिए आता है, तो उस समय स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। हालांकि, वे खुद भी सदन में मौजूद हो सकते हैं, अपनी बात रख सकते हैं, और अगर मतदान में बराबरी की स्थिति बनती है, तो निर्णायक मत भी दे सकते हैं।
विपक्ष की स्थिति:
इस बीच, विपक्ष ने अपनी स्थिति साफ कर दी है कि वह अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाएगा। इसके बजाय, विपक्ष संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत एक प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। यह पूरी तरह एक संविधानिक प्रक्रिया है, जो केवल लोकसभा स्पीकर के पद से जुड़ी होती है। अनुच्छेद 94(c) में यह साफ है कि स्पीकर को हटाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना होता है।
अनुच्छेद 94(c) के तहत प्रक्रिया:
नोटिस: प्रस्ताव लाने से कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होता है।
प्रस्ताव का समर्थन: प्रस्ताव को पारित कराने के लिए लोकसभा में मौजूद सदस्यां का आधिकारिक बहुमत जरूरी है।
यह प्रक्रिया अविश्वास प्रस्ताव से अलग है, क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ लाया जाता है, जबकि यह प्रस्ताव सिर्फ स्पीकर के पद पर ही आधारित होता है। विपक्ष का कहना है कि वह सरकार गिराने का इरादा नहीं रखता, बल्कि वह सिर्फ लोकसभा की कार्यवाही और स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठा रहा है।
स्पीकर के पद समाप्त होने के अन्य कारण:
इसके अलावा, कुछ और स्थितियां भी हो सकती हैं, जब स्पीकर का पद समाप्त हो सकता है:
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत अगर स्पीकर लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिए जाते हैं, तो वे स्वचालित रूप से स्पीकर के पद से भी हटा दिए जाते हैं।
इस्तीफा: स्पीकर अपनी इच्छा से भी इस्तीफा दे सकते हैं, जो उन्हें लोकसभा के उपाध्यक्ष यानी डिप्टी स्पीकर को सौंपना होता है।



