
लोकसभा में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरमौजूदगी को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद उभरा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ विपक्षी सांसद, विशेषकर महिला सांसद, प्रधानमंत्री पर कथित फिजिकल अटैक की योजना बना रहे थे। इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट्स लोकसभा स्पीकर के कार्यालय द्वारा “प्लांट” की गई हैं।
इस विवाद की पृष्ठभूमि यह है कि गुरुवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी सदन में उपस्थित नहीं हुए। मोदी की गैरमौजूदगी पर केंद्रित मीडिया रिपोर्ट्स ने तुरंत राजनीतिक हलचल पैदा कर दी। पवन खेड़ा ने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए कहा, “लोकसभा स्पीकर के ऑफिस से मीडिया में रिपोर्ट्स प्लांट की जा रही हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी महिला सांसदों के माध्यम से कल प्रधानमंत्री पर हमला करने की योजना बना रही थी।”
कांग्रेस का आरोप और महिला सांसदों का मुद्दा
खेड़ा ने इस पूरे घटनाक्रम को मोदी सरकार और उनके “दब्बू पत्रकारों” की साजिश करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संसद में महिला विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन अब आतंकवाद की श्रेणी में आ गया है। उन्होंने आगे कहा कि क्या मोदी सरकार और उनके आज्ञाकारी पत्रकार यह संदेश देना चाह रहे हैं कि महिलाएं स्वाभाविक रूप से हिंसक और प्रदर्शनकारी होती हैं। कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से दलित महिला सांसदों के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख किया और कहा कि क्या उनके खड़े होने को अछूत समझा गया या सरकार को असहज किया गया।
खेड़ा ने केंद्र सरकार और उनके सहयोगी मीडिया से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार और उनके गुलाम पत्रकारों को देश की महिलाओं, खासकर दलित महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।” कांग्रेस का यह आरोप केवल व्यक्तिगत आलोचना नहीं, बल्कि संसद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी पर हमला करने के रूप में देखा जा रहा है।
स्पीकर की सफाई और पीएम की सुरक्षा का हवाला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया गया कि वे सदन में उपस्थित न हों ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। स्पीकर ने कहा, “मुझे जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद PM की सीट के पास पहुंच सकते हैं और ऐसी घटना कर सकते हैं जो पहले कभी नहीं हुई। इसे रोकने के लिए मैंने पीएम से न आने का अनुरोध किया।”
बिरला ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री ने उनकी सलाह मानते हुए सदन में उपस्थिति नहीं दर्ज कराई। स्पीकर ने कहा कि यह कदम देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए जरूरी था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिला सांसदों द्वारा पोस्टर और पैम्फलेट लहराने की घटनाओं पर उन्होंने आपत्ति जताई और सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की हिदायत दी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और मीडिया पर आरोप
यह विवाद तब और गरमाया जब महिला विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के पास विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ बैनर और पोस्टर लहराए। इस दौरान विपक्षी नेता राहुल गांधी को 2020 के चीन गतिरोध पर पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित यादों से कोट देने की अनुमति नहीं मिलने पर हंगामा हुआ।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम मोदी सरकार और उनके समर्थक मीडिया द्वारा विपक्ष और विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ बदनाम करने के उद्देश्य से बनाया गया। पवन खेड़ा ने इसे लोकतंत्र और संसद की गरिमा पर हमला करार दिया। उनके अनुसार, संसद में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को आतंकवाद या हिंसा के रूप में पेश करना अनुचित है।








