
प्रयागराज- माघ मेले में एक सप्ताह से अधिक समय से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज भारी मन से माघ मेला छोड़कर काशी के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि वे बिना संगम में पवित्र स्नान किए वापस जा रहे हैं, जो उनके लिए अत्यंत दुखद और अस्वीकार्य अनुभव रहा है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से कहा कि माघ मेला में आने का उनका उद्देश्य आस्था, श्रद्धा और शांति के साथ संगम में स्नान करना था, लेकिन घटनाओं ने उनके मन को गहरा आहत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वह स्थिति नहीं थी जिसकी उन्होंने कभी कल्पना की थी, और इस कारण वे बिना स्नान किए और दुःखी मन से मेला छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनकी आत्मा को झकझोर देने वाला रहा है और इससे उनका विश्वास तक डगमगा गया है।
स्वामी ने उन लोगों पर तंज कसा जिन्होंने उनके साथ व्यवहार किया, और कहा कि समय आने पर लोग उन्हें उनकी जगह दिखाएंगे जिन लोगों ने उन्हें अपमानित किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और उसके प्रतीकों का अपमान है, जिसे वह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते।
यह विवाद माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था, जब प्रशासन और मेले अधिकारियों ने भीड़ के कारण उन्हें संगम तट तक पालकी में जाने से रोका था। इस पर उनके अनुयायियों और प्रशासन के बीच कुछ विवाद भी देखने को मिला था, जिसके बाद स्वामी ने विरोध स्वरूप धरने पर बैठने का निर्णय लिया।









