
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज़ हो गया है. छात्र संगठनों, शिक्षकों और विपक्षी दलों के साथ-साथ अब यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. उत्तर प्रदेश में विरोध का अनोखा तरीका सामने आया, जहां कुछ संगठनों ने सवर्ण सांसदों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भेजीं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए नियम सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर करते हैं और इससे आरक्षण व्यवस्था पर अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा.
UGC के नए नियमों में विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों, योग्यता मानकों और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े बदलाव किए गए हैं. आलोचकों का कहना है कि इन नियमों से राज्य सरकारों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम होगी, जबकि केंद्र का हस्तक्षेप बढ़ेगा. साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि नियुक्तियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व घट सकता है. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इन नियमों को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है.
उत्तर प्रदेश में विरोध और ज्यादा मुखर नजर आया. कई जगह प्रदर्शन हुए और सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वे सामाजिक न्याय के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पहले से मौजूद असमानताओं को दूर करने के बजाय नए नियम उन्हें और गहरा कर सकते हैं. छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने नियम वापस नहीं लिए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
वहीं केंद्र सरकार और UGC ने सभी आरोपों को खारिज किया है. सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और वैश्विक मानकों के अनुरूप भारतीय विश्वविद्यालयों को मजबूत बनाना है. शिक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि इन नियमों से किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होगा और आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह लागू रहेगी. सरकार के मुताबिक, नियमों को लेकर फैल रही आशंकाएं बेबुनियाद हैं और राजनीतिक कारणों से मुद्दे को तूल दिया जा रहा है.
हालांकी यह विवाद केवल शिक्षा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध सामाजिक संतुलन और संघीय ढांचे से भी है. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब सबकी नजरें न्यायपालिका के रुख पर टिकी हैं. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि UGC के नए नियम सुधार की दिशा में कदम साबित होते हैं या फिर व्यापक विरोध के चलते सरकार को इनमें बदलाव करना पड़ेगा.





