
बिहार कांग्रेस में उभरी अंदरूनी कलह को थामने के लिए पार्टी हाईकमान ने हस्तक्षेप किया है। शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे। यह बैठक पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित दही-चूड़ा भोज में कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति के बाद पैदा हुए सियासी विवाद के मद्देनजर बुलाई गई।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि बिहार में कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक अवसर मौजूद है और सभी नेताओं को मिलकर पार्टी को मजबूत करना होगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस के राजनीतिक स्पेस को बढ़ाने की जरूरत है और नकारात्मक राजनीति से बचना होगा। इसके लिए जल्द ही एक कोऑर्डिनेशन कमिटी गठित की जाएगी।
राहुल गांधी ने बिहार के कांग्रेस नेताओं को जमीन पर उतरकर काम करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ पद और जिम्मेदारी लेने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनता के बीच सक्रिय होकर संगठन को मजबूत करना होगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जहां उनकी जरूरत होगी, वे खुद मौजूद रहेंगे।
बैठक में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी शामिल हुए, जिन्होंने राय दी कि कांग्रेस को बिहार में आरजेडी से अलग राह अपनानी चाहिए, तभी सत्ता में आने की संभावना बनेगी। वहीं तारिक अनवर ने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना संगठन मजबूत नहीं हो सकता।
बैठक में बिहार के सामाजिक और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मदन मोहन झा ने राज्य में बढ़ते नशाखोरी के मामलों को गंभीर चिंता बताया। इस पर राहुल गांधी ने इसे जनहित का बड़ा मुद्दा बताते हुए संगठन को सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया।









