
मनरेगा बचाओ सम्मेलन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अलग अंदाज में मंच से सरकार पर हमला बोला। सिर पर गमछा बांधे और कंधे पर कुदाल रखे राहुल गांधी ने खुद को मजदूरों के साथ खड़ा बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रतीक नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों से सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों की आवाज है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नई योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि VB-GRAM-G सिर्फ एक जुमला है, जिसे गरीबों को गुमराह करने के लिए पेश किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के बजट में कटौती कर सरकार गरीबों के रोजगार के अधिकार को खत्म करना चाहती है।
राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को संकट के समय सहारा दिया है। चाहे महामारी का दौर हो या आर्थिक मंदी, इस योजना ने गरीबों को भूख से बचाया। लेकिन आज सरकार इसे कमजोर करने पर तुली हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ करती है, लेकिन मजदूरों की मजदूरी देने में आनाकानी करती है। यह दोहरे मापदंडों की राजनीति है। राहुल गांधी ने मनरेगा मजदूरों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस उनके अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।
सम्मेलन में वक्ताओं ने भी मनरेगा के महत्व पर प्रकाश डाला और सरकार से बजट बढ़ाने, समय पर भुगतान और काम के दिनों में वृद्धि की मांग की। कार्यक्रम के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि जब तक गरीबों का हक सुरक्षित नहीं होगा, उनकी आवाज संसद और सड़क दोनों जगह गूंजती रहेगी।









