
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े हालिया विवाद ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कुछ लोगों पर सनातन धर्म को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा भारत की आत्मा है और इसे तोड़ने या बदनाम करने का प्रयास करने वालों को समाज स्वीकार नहीं करेगा।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति सहिष्णुता, एकता और राष्ट्रबोध का आधार रही है। कुछ लोग व्यक्तिगत स्वार्थ या राजनीतिक एजेंडे के तहत धर्माचार्यों और धार्मिक संस्थाओं को विवादों में घसीटने का काम कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने समाज से ऐसे प्रयासों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
इस बीच, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी दलों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बनाया जा रहा है और धार्मिक मतभेदों को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। वहीं, संत समाज का एक वर्ग शंकराचार्य के समर्थन में सामने आया है और उनके विचारों को सनातन परंपरा के अनुरूप बताया है। तो वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने संयमित और सम्मानजनक रुख अपनाते हुए बयान दिया है। डिप्टी सीएम ने कहा कि शंकराचार्य सनातन परंपरा के सर्वोच्च धर्माचार्यों में से हैं और उनके चरणों में प्रणाम है। उन्होंने अपील की कि इस विषय को अनावश्यक तूल न दिया जाए और विवाद को यहीं समाप्त किया जाए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा संवाद, मर्यादा और संतुलन पर आधारित रही है। किसी भी प्रकार के मतभेदों को आपसी संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक विवाद का रूप दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी धर्माचार्य या धार्मिक संस्था का अपमान करना नहीं है।









