
प्रयागराज में चल रहे माघ मेला के दौरान ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। माघ मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस प्रक्रिया के तहत ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य बने। प्रशासन ने उनसे निर्धारित समयसीमा के भीतर जवाब मांगा है।
सूत्रों के मुताबिक, मेला क्षेत्र में शंकराचार्य पद और धार्मिक पहचान को लेकर कुछ शिकायतें प्रशासन तक पहुंची थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर माघ मेला प्रशासन ने यह कदम उठाया है। नोटिस में पूछा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य घोषित किए जाने की परंपरागत प्रक्रिया क्या रही और क्या उनके पास इससे जुड़े प्रमाण मौजूद हैं।
माघ मेला प्रशासन का कहना है कि मेला क्षेत्र में किसी भी संत या धार्मिक पद से जुड़े व्यक्ति को अपनी पहचान और परंपरागत मान्यता को स्पष्ट करना अनिवार्य है, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या विवाद न उत्पन्न हो। प्रशासन का यह भी कहना है कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों का कहना है कि वे सनातन परंपराओं के अनुसार ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य हैं और पूर्व शंकराचार्य के निर्देशन में उन्हें यह दायित्व सौंपा गया था। उनका तर्क है कि प्रशासन को धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
इस नोटिस के बाद संत समाज और धार्मिक संगठनों में भी हलचल तेज हो गई है। कुछ संतों ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया है, तो कुछ ने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए आपत्ति जताई है। अब सबकी निगाहें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब पर टिकी हैं









