
भारत के लिए गर्व का क्षण तब आया, जब यूनेस्को ने दिवाली को विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दे दी। यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय त्योहार को सीधे विश्व धरोहर के सांस्कृतिक श्रेणी में शामिल किया गया है। यूनेस्को ने इसे मानव सभ्यता के सबसे बड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सवों में से एक करार दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दिवाली न केवल एक त्योहार है, बल्कि “भारत की सभ्यता की आत्मा” है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव प्रकाश, उम्मीद और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिसे वैश्विक पहचान मिलना पूरे देश के लिए सम्मान की बात है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में पहले से ही कुंभ मेला, योग, नवरात्रि गरबा, रामलीला सहित 15 भारतीय सांस्कृतिक धरोहरें शामिल हैं। दिवाली के जुड़ने से भारत की सांस्कृतिक उपस्थिति और भी मजबूत हो गई है।यूनेस्को ने दिवाली को अपनी रिपोर्ट में “संस्कृतियों को जोड़ने वाला वैश्विक उत्सव” और “प्रकाश और सत्य की विजय का सार्वभौमिक प्रतीक” बताया है। दुनिया के कई देशों में मनाए जाने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है।
सरकार ने कहा है कि यह उपलब्धि भारत की प्राचीन परंपराओं, उत्सवों और सांस्कृतिक मूल्यों की वैश्विक मान्यता का प्रमाण है। देशभर में इस घोषणा के बाद लोगों में खुशी की लहर देखी जा रही है।








