
नई दिल्ली। संसद में आज वंदे मातरम् के मुद्दे पर तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम् का विरोध करना गांधी परिवार की राजनीतिक परंपरा और उनके खून में शामिल है। जब-जब राष्ट्रवाद की बात आती है, कांग्रेस नेतृत्व इसके खिलाफ खड़ा दिखाई देता है।” शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हर राष्ट्रीय प्रतीक पर विवाद खड़ा करती है और इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़ देती है।
अमित शाह के इस बयान पर सदन का माहौल गर्म हो गया। कांग्रेस सांसदों ने कड़ा विरोध किया और इस मुद्दे को “राजनीतिक ध्रुवीकरण” का प्रयास बताया। शाह ने कहा कि वंदे मातरम् एक राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, और इसके विरोध को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रगान और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े मुद्दों को बार-बार राजनीति का मंच बना रहा है।इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तुरंत पलटवार किया। खड़गे ने कहा, “देश में असली मुद्दे क्या हैं? महंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी चरम पर है और डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। सरकार इन सवालों पर चुप क्यों है? इन मुद्दों पर चर्चा से ध्यान हटाने के लिए वंदे मातरम् को बीच में लाया जा रहा है।”
खड़गे ने सरकार से मांग की कि वह संसद में आर्थिक मंदी, गिरते रुपये, बढ़ती महंगाई और रोजगार की स्थिति पर व्यापक चर्चा कराए। “ये देश के असली सवाल हैं, जिनसे आम आदमी की जिंदगी प्रभावित हो रही है, खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार हर बहस को हिंदू-मुस्लिम या राष्ट्रवाद बनाम विरोध के फ्रेम में बदलना चाहती है, ताकि लोगों की रोजमर्रा की समस्याएं पीछे छिप जाएं।
इस बहस के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। भाजपा सांसदों ने खड़गे के आर्थिक तर्कों को “आधे-अधूरे आंकड़े” बताया, जबकि कांग्रेस ने अमित शाह के बयान को “व्यक्तिगत हमला” करार दिया।संसद में आज का दिन राजनीतिक रूप से बेहद गर्म रहा। एक ओर शाह ने कांग्रेस नेतृत्व को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर घेरा, तो दूसरी ओर खड़गे ने अर्थव्यवस्था पर सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया। स्पष्ट है कि वंदे मातरम् की बहस से आगे बढ़कर यह टकराव अब व्यापक राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों तक पहुंच चुका है।









