
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों को कड़े शब्दों में चेताया कि आम लोगों को अनावश्यक और भारी-भरकम कागज़ी प्रक्रियाओं से दूर रखा जाए। उन्होंने कहा कि “लोगों से 30–40 पेज के फॉर्म मत भरवाइए। सरकारी कामकाज का मकसद लोगों की जिंदगी आसान बनाना है, मुश्किल नहीं।” सरकारी कामकाज को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में यह मोदी का बड़ा संदेश माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मंत्री परिषद की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मंत्रालय अपने विभागों में चल रही प्रक्रियाओं की समीक्षा करें और जिन नियमों का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं है, उन्हें तुरंत हटाया जाए।
मोदी ने कहा कि भारत डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है, ऐसे में कागज़ों का बोझ कम करके लोगों को सुविधाओं का सीमलेस एक्सपीरियंस दिया जाना चाहिए। अगर हम जनता से ही भारी-भरकम फॉर्म भरवाते रहेंगे, तो डिजिटल इंडिया का असली उद्देश्य पूरा नहीं होगा
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नियम-कानून जनता के लिए होते हैं, जनता को परेशान करने के लिए नहीं। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अपने विभागों में हर उस प्रक्रिया की पहचान करें, जिसमें जनता का समय और पैसा अनावश्यक रूप से खर्च होता है। जो फॉर्म 2 पेज में हो सकता है, उसे 30–40 पेज का बनाना सिर्फ समय की बर्बादी है… उन्होंने सरकारी सेवाओं को सरल बनाने के लिए तीन प्रमुख सुझाव दिए—
पहला, सभी फॉर्म और प्रक्रियाएं डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध हों।
दूसरा, आवेदन प्रक्रिया में मांगी जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी को न्यूनतम किया जाए।
तीसरा, एक विभाग द्वारा लिए गए दस्तावेज़ों को दोबारा दूसरे विभाग द्वारा मांगने की प्रथा खत्म हो।
बैठक में प्रधानमंत्री के निर्देशों के बाद कई मंत्रालयों ने अपने-अपने विभागों में प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू करने का संकेत दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार ईज ऑफ लिविंग से जुड़े कई बड़े सुधार पेश कर सकती है।








