
नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन लोकसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा हुई। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भाषण देते हुए वंदे मातरम् और इसके महत्व पर जोर दिया।
प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम् 150 साल से देश की आत्मा का हिस्सा है और यह हर भारतीय के हृदय में जीवित है। उन्होंने कहा कि आज वंदे मातरम् पर बहस दो वजहों से हो रही है: पहला बंगाल चुनाव और दूसरा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर आरोप लगाना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों को बांटना चाहती है।
सांसद ने वंदे मातरम् का इतिहास बताते हुए कहा कि इसके पहले दो अंतरे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में उपन्यास आनंदमठ में लिखे। 1896 में रबींद्रनाथ टैगोर ने इसे कांग्रेस अधिवेशन में गाया और 1905 में इसे ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा के रूप में अपनाया गया। उन्होंने बताया कि 1930 के दशक में सांप्रदायिक राजनीति के कारण इसे विवादित बनाने की कोशिश हुई।
प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम् के इस स्वरूप पर सवाल उठाना उन महान विभूतियों का अपमान है, जिन्हें संविधान सभा ने स्वीकार किया। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र करते हुए कहा कि नेहरू ने देश के लिए 12 साल जेल में बिताए और उनके योगदान का अपमान किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
सांसद ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की वर्तमान समस्याओं जैसे बेरोजगारी, गरीबी और प्रदूषण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों को इन मुद्दों पर काम करने के लिए चुना है।
प्रियंका गांधी ने अंत में कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति समर्पण और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है, जिसे सम्मान और संवेदनशीलता के साथ देखना चाहिए।









