
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ के टैग की आलोचना करते हुए इसे भारत की गुलामी मानसिकता का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा भारत की क्षमताओं और विकास के प्रति अविश्वास की निशानी है।
पीएम मोदी ने यह टिप्पणी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में की, जिसमें उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे टैग या लेबल भारतीय समाज और उसकी मेहनत को सही ढंग से नहीं परिभाषित करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का विकास दर किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है और इसे ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ जैसे नामों से जोड़कर पेश करना पूरी तरह गलत है।
प्रधानमंत्री ने कहा, यह केवल नकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत है। हमारी आज़ादी और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में हमें किसी भी तरह की गुलामी मानसिकता से बाहर निकलना होगा। विकास और प्रगति को किसी एक समुदाय या धर्म से जोड़ना सही नहीं है। पीएम मोदी की यह टिप्पणी उन आलोचनाओं के बीच आई है, जो पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि और विकास दर के आंकड़ों को लेकर चर्चा में रही हैं। उन्होंने इसे आर्थिक नीति और सामाजिक दृष्टिकोण में संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों और युवाओं से अपील की कि वे देश की प्रगति और विकास में विश्वास रखें और नकारात्मक सोच या पुराने मानसिक बंधनों से बाहर आएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का भविष्य उसकी मेहनत, क्षमता और समर्पण पर निर्भर करता है, न कि किसी धर्म या समुदाय विशेष के आधार पर बनाए गए टैग पर।







