
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ रही है। अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार विवादों का भारत की ग्रोथ पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इसके विपरीत, चीन और जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ दर भारत की तुलना में धीमी रही है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की मजबूत घरेलू खपत, सेवाओं के क्षेत्र की निरंतर वृद्धि और निवेश में बढ़ोतरी ने इस तेज़ी को संभव बनाया है। “भारत की आर्थिक रणनीति ने वैश्विक दबावों के बावजूद देश को स्थिर और तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनाया है,” एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने कहा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की हालिया रिपोर्टों में भी भारत की GDP ग्रोथ को लेकर सकारात्मक रुझान दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ दर लगभग 6.8% रहने की संभावना है, जबकि चीन लगभग 4.5% और जापान सिर्फ 1.2% की दर से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक सप्लाई चेन की चुनौतियों ने भारत के निर्यात को कुछ हद तक प्रभावित किया है, लेकिन घरेलू बाजार की मजबूती और निवेश के अवसरों ने इसका असर कम कर दिया। इसके अलावा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने भी आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा दिया है।
कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद खुद को सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में साबित किया है। चीन और जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की धीमी ग्रोथ भारत के लिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने का अवसर भी पैदा कर रही है।









